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न्यूयॉर्क में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सुभाष शर्मा की भागीदारी

न्यूयॉर्क में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कॉन्फ्रेंस में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में डॉ. सुभाष शर्मा ने भाग लिया। इस सम्मेलन में लगभग 6000 अमेरिकी भारतीयों ने भाग लिया, जो भारत की संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यह आयोजन प्रवासी भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करता है और भारत की सकारात्मक वैश्विक छवि को मजबूत करता है।
 

यूनिवर्सल वननेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय संस्कृति का प्रचार

नंगल: न्यूयॉर्क में अहेड फोरम द्वारा आयोजित यूनिवर्सल वननेस कॉन्फ्रेंस में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने विशेष रूप से भाग लिया। डॉ. शर्मा ने बताया कि इस सम्मेलन में लगभग 6000 अमेरिकी भारतीयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह भागीदारी प्रवासी भारतीयों के भारत की संस्कृति, परंपराओं और मातृभूमि के प्रति गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।


डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा कि मोहन भागवत का न्यूयॉर्क दौरा भारतीय संस्कृति और विचारधारा को वैश्विक स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत करने वाला रहा। उन्होंने सम्मेलन में विविधता में एकता, आपसी सौहार्द और विश्व कल्याण की भावना को प्रमुखता से रखा। मोहन भागवत ने भारतीय मूल्यों और संस्कृति के महत्व को बताते हुए विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, समन्वय और परस्पर सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। यह आयोजन अमेरिका में रह रहे भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करता है और भारत की सकारात्मक वैश्विक छवि को भी मजबूत करता है।


डॉ. शर्मा ने कहा कि मोहन भागवत के अधिवेशन ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों में भारत के प्रति राष्ट्रीयता और गर्व की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। प्रवासी भारतीय अपनी पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजते हुए भारत के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।


अमेरिका प्रवास के दौरान, डॉ. सुभाष शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें अमेरिका की प्रगति में योगदान देने और भारत की खुशहाली और विकास के लिए दूत की भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान, अनुभव, प्रतिभा और संसाधनों का उपयोग भारत की विकास यात्रा को गति देने में कर सकते हैं, जिससे भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी।