पंचायत अभिनेता विनोद सूर्यवंशी ने जातिगत भेदभाव का किया खुलासा
जातिगत भेदभाव पर विनोद सूर्यवंशी का बयान
पंचायत वेब सीरीज में सचिव का किरदार निभाने वाले अभिनेता ने जातिगत भेदभाव का किया खुलासा
मुंबई: अक्सर यह कहा जाता है कि भारत में जातिगत भेदभाव समाप्त हो गया है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। जो लोग इसका सामना करते हैं, वही इसकी सच्चाई को बयां कर सकते हैं। चाहे आपने कितनी भी सफलता हासिल की हो, कुछ लोग आज भी जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव करते हैं।
पॉपुलर वेब सीरीज 'पंचायत' के चौथे सीजन में नजर आए अभिनेता ने अपने बचपन के अनुभव साझा किए हैं, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे गांव में दलितों को अलग रखा जाता है और उन्हें मंदिर में जाने की अनुमति नहीं होती। यह कहानी विनोद सूर्यवंशी की है।
आपने पहले भी कई फिल्मों और वेब सीरीज में उनका नाम सुना होगा। उन्होंने 'पंचायत' में सचिव की भूमिका निभाई है और उनकी फिल्मों में 'थामा', 'सत्यमेव जयते' और 'जॉली एलएलबी 3' शामिल हैं। हाल ही में, उन्होंने जातिवाद के खिलाफ दिल को छू लेने वाली बातें साझा की हैं।
जातिवाद का सामना करते हुए विनोद का अनुभव
विनोद सूर्यवंशी ने कहा कि कर्नाटक के उनके गांव में जातिवाद आज भी प्रचलित है। गांव में ऊंची और नीची जातियों के लिए अलग-अलग हिस्से हैं। दलितों का क्षेत्र गांव से पूरी तरह अलग है।
पिता के अपमान का किस्सा
उन्होंने बताया कि जब वह अपने पिता के साथ गांव गए थे, तब उनकी उम्र केवल 12 साल थी। उन्होंने कहा, "हमने एक होटल में खाना खाया, लेकिन हमें अपनी प्लेटें खुद धोनी पड़ीं और खाने का भुगतान भी करना पड़ा।"
विनोद ने यह भी बताया कि उनके गांव में एक ऐसा मंदिर है, जहां उन्हें जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने गरीबी में बड़े होने के बारे में भी बात की, जहां त्योहारों के समय उनके परिवार में खुशी की जगह दुख होता था।
एक्टिंग से पहले का संघर्ष
विनोद ने बताया कि अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए, जैसे चौकीदारी। इस दौरान उनके पैरों में छाले पड़ गए थे। उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति को उसके काम के आधार पर ही आंकता है। वह कहते हैं, "काम जितना बड़ा होगा, इज्जत उतनी ही ज्यादा मिलेगी।"