पंजाब कांग्रेस में असंतोष: चन्नी के आवास पर हुई आपात बैठक
पंजाब कांग्रेस में बढ़ते मतभेद
चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक निर्णयों को लेकर फिर से आंतरिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के निवास पर आयोजित आपात बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष पद के संदर्भ में कांग्रेस नेतृत्व के निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विवाद पार्टी नेतृत्व से नहीं, बल्कि हाल के संगठनात्मक निर्णयों से है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की।
बैठक में शामिल नेताओं की संख्या
मोरिंडा में चन्नी के आवास पर हुई बैठक में लगभग 50 नेता शामिल हुए, जिनमें तीन मौजूदा विधायक, कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल थे। यह बैठक उस समय आयोजित की गई जब कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को फिर से पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए रखने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद पार्टी के एक हिस्से में नाराजगी देखी गई।
फैसले पर पुनर्विचार की मांग
बैठक के बाद विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने कहा कि नेताओं ने चन्नी से अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे को कांग्रेस हाईकमान के समक्ष रखें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी का पार्टी नेतृत्व से टकराव नहीं है। सभी नेता चाहते हैं कि संगठनात्मक निर्णय कार्यकर्ताओं और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिए जाएं, ताकि कांग्रेस सत्ता में वापस आ सके।
बैठक में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
बैठक में विधायक राणा गुरजीत सिंह और कुलवंत सिंह सिद्धू के अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, गुरकीरत सिंह कोटली, पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक, बलकौर सिंह और कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बड़ी उपस्थिति को पंजाब कांग्रेस में बढ़ती असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
रंधावा का स्पष्टीकरण
इस बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपनी मुलाकात को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मुलाकात पहले से तय थी और इसका उद्देश्य केवल पंजाब की कानून व्यवस्था पर चर्चा करना था। उन्होंने इस मुलाकात को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों को गलत बताया।
समिति गठन और चन्नी के समर्थन की आवाज
बैठक के बाद पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों ने वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनाने की घोषणा की। उनका कहना था कि हाल के संगठनात्मक निर्णयों में कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। वहीं, पूर्व विधायक दर्शन बराड़ ने कहा कि यदि चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो कांग्रेस के लिए अगला विधानसभा चुनाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है।