पंजाब की औद्योगिक नीति में सुधार से निवेश को मिलेगा बढ़ावा
औद्योगिक और व्यापार विकास नीति में संशोधन
पंजाब के औद्योगिक माहौल को सशक्त बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 'औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026' में संशोधन के तहत, पंजाब उद्योग क्रांति पहल के अंतर्गत विभिन्न सेक्टोरल नीतियों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। इन संशोधनों में वित्तीय रियायतें अब केवल मौजूदा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पर लागू होंगी।
ये संशोधन औद्योगिक क्लस्टरों, अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को भी सुदृढ़ करते हैं। पहले 50 योग्य इकाइयों के लिए 10 लाख रुपये का एकमुश्त प्रोत्साहन अब न्यूनतम गोल्ड लेवल जेडईडी सर्टिफिकेशन या उससे अधिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाले उद्योगों को भी शामिल करेगा।
निवेश को बढ़ावा देने की उम्मीद
इन सुधारों से निवेश को बढ़ावा मिलने और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे पंजाब देश में एक आकर्षक निवेश स्थान के रूप में उभर सकता है। मंत्रिमंडल ने कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट) की पुनः परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को राहत देना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, और जनता के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
इसके अलावा, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में सुधार करने का भी लक्ष्य है।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
नीट परीक्षार्थियों और उनके सहायक के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा, 1,013 लेक्चरारों और 156 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती, और पटियाला तथा जालंधर में गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्टों की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि मंत्रिमंडल ने विद्यार्थी कल्याण, शिक्षा, रोजगार के अवसरों, बुनियादी ढांचे के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रशासनिक सुधारों और औद्योगिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी है।