पंजाब के बुजुर्ग की तीर्थयात्रा: तकनीक और मानवता की अनोखी कहानी
अमृतसर में बुजुर्ग की यात्रा का किस्सा
पंजाब के एक बुजुर्ग व्यक्ति की कहानी सामने आई है, जो अमृतसर की तीर्थयात्रा के दौरान अपने समूह से बिछड़ गए थे। चमन लाल, जो लुधियाना के फतेहगढ़ गुजरान गांव के निवासी हैं, गलती से बिहार पहुंच गए। उन्हें अपना पूरा पता याद नहीं था, केवल अपने गांव का नाम ही बता सके।
गयाजी में मिली मदद
गयाजी में एक स्थानीय व्यक्ति ने चमन लाल की सहायता की। उसने उन्हें अपने घर में रखा, भोजन कराया और इंटरनेट तथा ChatGPT की मदद से उनके गांव का पता लगाने का प्रयास किया। लगभग तीन दिन की मेहनत के बाद, अंततः बुजुर्ग के गांव की पहचान हो गई। इसके बाद, वह स्थानीय व्यक्ति उन्हें पंजाब ले गया और उनके परिवार से मिलवाया।
तीर्थयात्रा के दौरान बिछड़ना
चमन लाल 11 सितंबर को पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। परिवार के अनुसार, उन्हें याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हैं। यात्रा के दौरान, वह अपने समूह से अलग हो गए और गलती से अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां, उन्होंने बिहार जाने वाली ट्रेन में चढ़ गए।
गयाजी में चार दिन की पनाह
गयाजी रेलवे स्टेशन के पास नीरज नामक एक स्थानीय व्यक्ति ने चमन लाल को देखा। बुजुर्ग परेशान और भूखे लग रहे थे। बातचीत के दौरान नीरज को पता चला कि चमन लाल अपना पूरा पता नहीं बता पा रहे हैं, केवल अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरान याद था। नीरज ने उन्हें अपने घर ले जाकर चार दिनों तक अपने परिवार के साथ रखा और इस दौरान उनके रिश्तेदारों और गांव का पता लगाने की कोशिश की।
ChatGPT की मदद से गांव की पहचान
चमन लाल पंजाबी में बात कर रहे थे। नीरज ने उनके बताए गांव के नाम के आधार पर इंटरनेट पर जानकारी खोजना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, नीरज ने लगभग तीन दिनों तक गांव के नाम के विभिन्न संयोजनों के साथ ChatGPT और इंटरनेट पर खोज की। अंततः, उन्हें लुधियाना जिले में मच्छीवाड़ा साहिब के पास स्थित फतेहगढ़ गुजरान गांव के बारे में जानकारी मिली। गांव की पहचान होने के बाद, नीरज ने बुजुर्ग को अकेले पंजाब भेजने के बजाय उनके साथ जाने का निर्णय लिया।