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पंजाब में बिजली संकट: तरुण चुग ने सरकार पर उठाए सवाल

पंजाब में बिजली संकट गहराता जा रहा है, जहां भाजपा के सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब उद्योगों को 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। चुग ने सरकारी थर्मल प्लांटों की क्षमता उपयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी संयंत्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है, जिसमें बिजली संकट के कारणों का स्पष्ट विवरण हो।
 

बिजली कटौती से उद्योगों को नुकसान

केजरीवाल के 24 घंटे बिजली के वादे की खुली पोल, उद्योगों को 14 घंटे तक कटौती से भारी नुकसान


पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांट 42 प्रतिशत क्षमता पर, जबकि नाभा पावर का पीएलएफ 93 प्रतिशत : चुग


चंडीगढ़: भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी और सांसद तरुण चुग ने पंजाब में बिजली संकट को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब राज्य में उद्योगों को 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू उपभोक्ता और किसान भी इस समस्या से प्रभावित हैं। इसके बावजूद, राज्य सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ रही है।


चुग ने कहा कि 24 घंटे बिजली देने का वादा करने वाली आप सरकार अब बिजली कटौती के लिए जानी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि धान की फसल, सिंचाई की आवश्यकताएं, गर्मी और घरेलू तथा औद्योगिक बिजली की बढ़ती मांग पहले से ज्ञात थी। इसके बावजूद, सरकार ने बिजली उत्पादन, कोयले की उपलब्धता और बिजली खरीद के लिए उचित तैयारी नहीं की।


केंद्रीय कोयला मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए चुग ने कहा कि 4 सितंबर तक पंजाब के तीन सरकारी थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक से 117 प्रतिशत अधिक था। फिर भी, अगस्त 2026 में इन प्लांटों का औसत क्षमता उपयोग केवल 42 प्रतिशत रहा।


उन्होंने कहा कि गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर स्टेशन, लेहरा मोहब्बत, गोइंदवाल साहिब थर्मल पावर प्लांट और रोपड़ थर्मल पावर स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 2,300 मेगावाट है, लेकिन अगस्त में इनका औसत क्षमता उपयोग केवल 42 प्रतिशत रहा। इसके विपरीत, नाभा पावर लिमिटेड का क्षमता उपयोग इसी अवधि में 93 प्रतिशत रहा।


चुग ने कहा, “जब एक निजी बिजली संयंत्र 93 प्रतिशत क्षमता पर चल सकता है, तो राज्य के सरकारी संयंत्र केवल 42 प्रतिशत क्षमता का उपयोग क्यों कर रहे हैं? भगवंत मान सरकार को अपनी उत्पादन क्षमता और संयंत्र प्रबंधन पर जवाब देना चाहिए।”


उन्होंने कहा कि बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। केंद्र सरकार ने पंजाब को कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की है। पीएसपीसीएल ने भी कोयला पहुंचाने की व्यवस्था की है।


चुग ने कहा कि यदि सरकारी थर्मल प्लांटों में पर्याप्त कोयला था और निजी संयंत्र अधिक क्षमता पर बिजली पैदा कर रहे थे, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके संयंत्र कम क्षमता पर क्यों चल रहे हैं। तकनीकी खराबियों के कारण उत्पादन इकाइयां बंद क्यों हैं और समय पर रखरखाव क्यों नहीं किया गया?


उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को सरकार चलाने का जनादेश दिया है, न कि बहाने बनाने का। केंद्र पर आरोप लगाने से उद्योगों की मशीनें नहीं चलेंगी और किसानों के ट्यूबवेल भी नहीं चलेंगे। राज्य सरकार को हर संभव स्रोत से बिजली की व्यवस्था करनी चाहिए।


चुग ने पंजाब सरकार से बिजली संकट पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसमें राज्य की कुल उत्पादन क्षमता, सरकारी थर्मल प्लांटों का उत्पादन, कोयले का स्टॉक, और बिजली खरीद का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति चाहिए।