पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए बीएलओ की सुरक्षा पर जोर
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में सुरक्षा प्राथमिकता
पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान, चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी है। फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की समस्या से बचाने के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, और प्रतिदिन फीडबैक लिया जाएगा।
बीएलओ की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था
मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने सभी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के बीएलओ के साथ प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करें। इसके लिए एक विशेष डिजिटल लिंक तैयार किया जा रहा है, जिससे पूरे महीने नियमित संवाद संभव होगा। इस दौरान बीएलओ अपनी समस्याएं, सुझाव और फील्ड की स्थिति सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे। चुनाव आयोग का मानना है कि एसआईआर अभियान की सफलता में बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी सुरक्षा और मनोबल बनाए रखना आवश्यक है।
दुर्व्यवहार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई
प्री-मैपिंग चरण के दौरान कुछ बीएलओ ने लोगों द्वारा अभद्र व्यवहार की शिकायतें की थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी बीएलओ के साथ दुर्व्यवहार की घटना होती है, तो संबंधित अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे। अनिंदिता मित्रा ने कहा कि बीएलओ इस प्रक्रिया की रीढ़ हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। आयोग चाहता है कि घर-घर जाकर चल रहे इस अभियान में कर्मचारियों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल मिले ताकि मतदाता सूची का कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।
प्री-मैपिंग में मानसा का नेतृत्व
पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत प्री-मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिलों के संदर्भ में मानसा 95.07 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि मोहाली में यह आंकड़ा 69.05 प्रतिशत है, जो सबसे कम है। अधिकारियों के अनुसार, मोहाली में पिछले दो दशकों में तेजी से शहरी विस्तार हुआ है, नए आवासीय क्षेत्र और हाईराइज इमारतें बनने के कारण मैपिंग चुनौतीपूर्ण रही है। हालांकि, आयोग का कहना है कि एसआईआर अभियान के दौरान सभी छूटे हुए क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। कई अन्य जिलों में भी 85 से 93 प्रतिशत तक प्री-मैपिंग पूरी हो चुकी है।