पंजाब में सरकारी और निजी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू
सरकार की नई पहल
पंजाब सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। सरबत.AI परियोजना के तहत कक्षा 6 से 12 के छात्रों को यह विषय पढ़ाने की योजना बनाई गई है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को नई तकनीकों, डिजिटल कौशल और उद्यमिता के लिए तैयार करना है। हालांकि, निजी स्कूलों ने इस योजना से जुड़ी फीस और प्रशिक्षण लागत पर सवाल उठाए हैं।
निजी स्कूलों में नई प्रणाली का कार्यान्वयन
इस योजना के अंतर्गत कक्षा 6 से 12 तक के सभी छात्रों का सरबत.AI पोर्टल पर पंजीकरण किया जाएगा। प्रत्येक छात्र को एक अलग लॉगइन ID प्रदान की जाएगी, जिसके माध्यम से AI विषय की पढ़ाई होगी। निजी स्कूलों को छात्रों से हर महीने 100 रुपये की फीस लेनी होगी। इसके अलावा, साल में तीन परीक्षाओं के लिए 50 रुपये प्रति परीक्षा और दो इकाई परीक्षाओं के लिए 10 रुपये शुल्क भी निर्धारित किया गया है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर खर्च
हर निजी स्कूल के दो शिक्षकों को AI पढ़ाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा। पहले वर्ष में चार सप्ताह की ट्रेनिंग के लिए प्रति शिक्षक 800 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। शिक्षकों को पूरी तरह से प्रशिक्षित करने में तीन साल का समय लगेगा, जिसमें एक शिक्षक पर कुल 21 हजार रुपये का खर्च आएगा। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि यह राशि छोटे संस्थानों के लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है।
पुस्तक और फीस पर आपत्ति
प्रशिक्षण के दौरान निजी स्कूलों को सूचित किया गया कि छात्रों को अध्ययन सामग्री संबंधित संस्था द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी कीमत 73 रुपये प्रति छात्र निर्धारित की गई है। निजी स्कूल एसोसिएशन ने मासिक फीस और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को फीस एकत्र कर संबंधित संस्था को भुगतान करना चाहिए, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार का दावा, छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना
सरकार सरबत.AI को राज्य की प्रमुख AI शिक्षा पहलों में से एक मानती है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे छात्रों को आधुनिक तकनीक को समझने और नए रोजगार के अवसरों के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी। छात्रों को नवाचार और रचनात्मकता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। वहीं, निजी स्कूलों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू करते समय छात्रों और स्कूल प्रबंधन पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम किया जाना चाहिए।