पंजाब विधानसभा चुनाव: नशे का मुद्दा बन रहा है चुनावी केंद्र
चंडीगढ़ में चुनावी हलचल
चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है, क्योंकि मौजूदा कार्यकाल का अंत 17 सितंबर को होने वाला है। इस समयावधि में राजनीतिक दलों ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाने का निर्णय लिया है। आम आदमी पार्टी, भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल सभी चुनावी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
नशे का मुद्दा चुनावी चर्चा का केंद्र
इस बार चुनावी परिदृश्य में नशे का मुद्दा प्रमुखता से उभर रहा है। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद से नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया है और समय-समय पर इसके परिणाम भी साझा किए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं।
भाजपा की रणनीति
भाजपा भी नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करने की योजना बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नशे की समस्या को खत्म करने को एक मिशन बताया है। भाजपा 18 सितंबर से पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता यात्राएं और रैलियां आयोजित करेगी, जिसे चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस की तैयारी
कांग्रेस ने भी नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बनाई है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट 15 सितंबर से अपने पहले दौरे की शुरुआत करेंगे। पहले दिन ही वह तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले को उठाकर रोष मार्च करेंगे। इसके अलावा, कांग्रेस कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा के निवास का घेराव करने की भी योजना बना रही है।
एकजुटता का प्रदर्शन
सचिन पायलट के दौरे के दौरान कांग्रेस अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का प्रयास करेगी। पार्टी के सभी प्रमुख नेता एक मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की है, जिससे कांग्रेस के भीतर एकजुटता का संदेश स्पष्ट होता है।
इसके साथ ही, शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने की योजना बना रहा है। इस प्रकार, नशे का मुद्दा चुनावी दलों के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार बनता नजर आ रहा है। सत्ता पक्ष अपने अभियानों को उपलब्धियों के रूप में पेश कर सकता है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने का प्रयास करेगा। आने वाले महीनों में पंजाब की चुनावी राजनीति में नशे के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप की संभावना बढ़ने की उम्मीद है।