पंजाब सरकार की 'स्माइल योजना' से भिक्षावृत्ति के खिलाफ नई पहल
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पहल
चंडीगढ़ - पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में, कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर के मार्गदर्शन में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 'स्माइल योजना' के तहत अमृतसर, पटियाला, लुधियाना और जालंधर में बेघर और भिक्षावृत्ति में शामिल व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए विशेष कदम उठाए हैं।
भिक्षावृत्ति में शामिल व्यक्तियों की पहचान
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि अमृतसर में मार्च 2026 से चल रहे सर्वेक्षण में अब तक 422 भिक्षावृत्ति में शामिल व्यक्तियों की पहचान की गई है। इनमें से 32 व्यक्तियों का सफल पुनर्वास किया गया है, जिनमें 8 को उनके परिवारों से पुनः जोड़ा गया, 2 बुजुर्गों को पेंशन दी गई, और 4 व्यक्तियों के आधार कार्ड बनवाए गए। इसके अलावा, 1 व्यक्ति को आशीर्वाद योजना का लाभ मिला, 4 को वृद्धाश्रम भेजा गया, और 13 को रोजगार से जोड़ा गया। पटियाला में भी 168 व्यक्तियों की पहचान की गई है और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।
स्माइल योजना का उद्देश्य
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति से मुक्ति दिलाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है। भिक्षावृत्ति में शामिल व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, काउंसलिंग, कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सामाजिक सहयोग की आवश्यकता
उन्होंने बताया कि योजना के तहत संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से भिक्षावृत्ति में शामिल व्यक्तियों की पहचान की जाती है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर काउंसलिंग, स्वास्थ्य जांच और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है। परिवारों की पहचान होने पर उन्हें पुनः जोड़ा जाता है, जबकि बेसहारा व्यक्तियों को पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जाता है।
सामाजिक जागरूकता का आह्वान
डॉ. बलजीत कौर ने आम जनता से अपील की कि वे सड़कों पर भिक्षा मांगने वालों को नकद राशि देने के बजाय उन्हें सरकार द्वारा उपलब्ध पुनर्वास और सामाजिक सहायता सेवाओं तक पहुंचाने में मदद करें। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही भिक्षावृत्ति-मुक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक 'रंगला पंजाब' का निर्माण संभव है।