पटना कोचिंग विवाद में न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय
कोचिंग विवाद में न्यायालय के फैसले
पटना में कोचिंग विवाद के सिलसिले में मंगलवार को न्यायालय ने दो महत्वपूर्ण निर्णय सुनाए। प्रधान जिला जज की अदालत ने खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की, जबकि ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। यह मामला कदमकुआं थाना क्षेत्र से संबंधित है, जहां दो प्रतिस्पर्धी कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है।
खान सर को मिली राहत
खान सर, जिन पर हत्या के प्रयास और अवैध शस्त्र उपयोग का आरोप है, के वकील अरविंद कुमार ने अदालत में उनके निर्दोष होने का दावा करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। लोक अभियोजक राजेश कुमार ने इस याचिका का विरोध किया। सुनवाई के बाद, प्रधान जिला जज रूपेश देव ने अगली सुनवाई की तारीख 20 जून तय करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
पुलिस से केस डायरी की मांग
अदालत ने पुलिस से इस मामले की केस डायरी और फैजल खान का संपूर्ण आपराधिक इतिहास प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, खान सर को यह भी कहा गया है कि वे पुलिस की जांच में सहयोग करें और जब भी बुलाए जाएं, उपस्थित रहें। यह निर्देश दर्शाता है कि अदालत मामले को गंभीरता से ले रही है।
विवाद का संक्षिप्त विवरण
कोचिंग संस्थान के पास हुई फायरिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, कदमकुआं थाने की पुलिस ने 04 जून 2026 को खान सर और उनके दो सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज
ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद पर खान ग्लोबल स्टडीज के गार्ड के साथ मारपीट करने का आरोप है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया। पुलिस ने रौशन आनंद के साथ अभिषेक कुमार और गौरव कुमार को भी तीन जून को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कांड संख्या 410/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
गार्डों की जमानत पर सुनवाई
खान ग्लोबल स्टडीज के दो सुरक्षा कर्मियों- प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह की नियमित जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। इन दोनों के वकील ने 7 जून को जमानत की मांग की थी, जिसके बाद अदालत ने केस डायरी और साक्ष्यों की मांग करते हुए अगली तारीख 10 जून निर्धारित की थी।