पटना मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नए दिशा-निर्देश
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदम
पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई कठोर कदम उठाए हैं। अब सभी चिकित्सकों को एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इमरजेंसी यूनिट में कार्यरत डॉक्टरों को प्रतिदिन कम से कम दो बार मरीजों का राउंड लेना होगा। मंगलवार को विभागीय अधिकारियों ने अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया।
डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के चिकित्सकों की ड्यूटी के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। सभी डॉक्टरों को प्रतिदिन सुबह 9 से शाम 5 बजे तक अस्पताल में रहना होगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मानकों के अनुरूप लागू की जा रही है। विभाग का उद्देश्य मरीजों को समय पर डॉक्टर उपलब्ध कराना और अस्पताल की सेवाओं में सुधार लाना है। मंगलवार को स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल का निरीक्षण किया।
आपातकालीन मरीजों पर विशेष ध्यान
आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए इमरजेंसी यूनिट में तैनात डॉक्टरों को विशेष जिम्मेदारियां दी गई हैं। उन्हें हर दिन कम से कम दो बार वार्ड में जाकर मरीजों की स्थिति की जांच करनी होगी। अधिकारियों का मानना है कि नियमित राउंड से गंभीर मरीजों में होने वाले परिवर्तनों का समय पर पता लगाया जा सकेगा। इससे जरूरत पड़ने पर इलाज में त्वरित बदलाव करना संभव होगा और आपात स्थिति में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
रिक्त पदों की जानकारी भेजने का निर्देश
पीएमसीएच में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रशासन से रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। स्वास्थ्य सचिव ने अधीक्षक के साथ चर्चा के बाद रिक्त पदों की अधियाचना जल्द विभाग को भेजने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान नए ओपीडी, पंजीकरण काउंटर और दवा वितरण केंद्र के निर्माण की प्रगति भी देखी गई। एलएंडटी और बीएमएसआइसीएल के अधिकारियों को गुणवत्ता, सुरक्षा और निर्धारित समयसीमा का पालन करने के लिए कहा गया है।
आयुष्मान मित्र मरीजों की सहायता करेंगे
अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना को प्रभावी बनाने के लिए जल्द ही प्रशिक्षित आयुष्मान मित्रों की तैनाती की जाएगी। ये मित्र मरीजों को योजना से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता करेंगे। डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए तकनीकी जानकारी देने वाली कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। दवाओं की उपलब्धता में आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए अमृत फार्मा के साथ बेहतर समन्वय बनाने का निर्देश दिया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि पात्र मरीजों को इमरजेंसी समेत इलाज में योजना का लाभ बिना किसी रुकावट के मिले।