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पठानकोट में पुलिस ने आतंकवादी साजिश का किया पर्दाफाश, बरामद हुए हथियार

पठानकोट की पुलिस ने एक बड़ी आतंकवादी साजिश को नाकाम करते हुए हथियारों का जखीरा बरामद किया है। इस कार्रवाई में तीन एके 47 राइफल, दो पिस्टल और बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि ये हथियार राज्य में किसी बड़ी वारदात के लिए इस्तेमाल किए जाने थे। प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का हाथ होने की बात सामने आई है। जानें इस मामले में और क्या जानकारी मिली है।
 

पठानकोट में बड़ी कार्रवाई


पठानकोट: पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र पठानकोट की पुलिस ने एक बड़ी आतंकवादी साजिश को नाकाम करते हुए एक बड़ा हथियारों का जखीरा बरामद किया है। यह कार्रवाई नरोट जैमल सिंह क्षेत्र में की गई, जहां से तीन एके 47 राइफल, दो पिस्टल, मैगजीन और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस मिले हैं।


आत्मघाती साजिश का खुलासा

पुलिस के अनुसार, इस हथियारों की खेप के पीछे पाकिस्तान में स्थित कुख्यात आतंकवादी हरविंदर सिंह रिंदा का हाथ है। पंजाब पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सीमा के निकट हथियारों का जखीरा छिपाया गया है। सूचना मिलते ही बॉर्डर रेंज के डीआईजी संदीप गोयल के निर्देश पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।




तलाशी अभियान का विवरण

पुलिस ने कैसे किया बरामद?


पठानकोट पुलिस की टीम ने खेतों और सुनसान स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक छिपे हुए स्थान से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। बरामद हथियारों में तीन एके 47 राइफल, पांच मैगजीन और दो पिस्टल शामिल हैं।


हथियारों की विशेषताएँ

और क्या-क्या हुआ बरामद?


इन पिस्टलों में एक तुर्की निर्मित और दूसरी चीन में बनी बताई जा रही है। इसके अलावा, विभिन्न कैलिबर के 98 जिंदा कारतूस भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का उपयोग राज्य में किसी बड़ी और सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था।


डीआईजी का बयान

डीआईजी संदीप गोयल ने क्या बताया?


डीआईजी संदीप गोयल ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हथियारों की यह खेप पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर भेजी गई थी। इसमें आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा की भूमिका भी सामने आई है, जो पहले भी कई आतंकवादी मामलों में वांछित रहा है। पुलिस ने नारोट जैमल सिंह थाने में इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।


पुलिस ने आरोपी आतंकी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार किसे सौंपे जाने थे और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क सक्रिय है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं।