पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाएंगे बृज लाल भट्ट और मोहन नागर
पद्म पुरस्कारों में बृज लाल भट्ट और मोहन नागर का योगदान
इस वर्ष, पद्म पुरस्कारों के तहत दो व्यक्तियों का नाम चर्चा में है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में इन दोनों को पद्मश्री से सम्मानित करेंगी। इनमें जम्मू-कश्मीर के बृज लाल भट्ट और मध्य प्रदेश के मोहन नागर शामिल हैं। दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वर्षों तक कार्य करते हुए ऐसा योगदान दिया है, जिसका प्रभाव आज भी लाखों लोगों के जीवन में देखा जा सकता है। एक ने कृषि और बागवानी को नई दिशा दी, जबकि दूसरे ने पर्यावरण और शिक्षा को समाज से जोड़कर बड़ा बदलाव लाया।
कश्मीर की बागवानी में बृज लाल भट्ट का योगदान
बृज लाल भट्ट का नाम जम्मू-कश्मीर के बागवानी विकास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बागवानी में उच्च शिक्षा प्राप्त की और कृषि तथा फल उत्पादन से संबंधित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनकी पहल पर प्रदेश में फल उत्पादन, भंडारण और विपणन को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाएं लागू की गईं।
भट्ट ने जम्मू-कश्मीर में कार्डबोर्ड पैकिंग, कोल्ड-चेन व्यवस्था और आधुनिक फल एवं सब्जी मंडियों की स्थापना को बढ़ावा दिया। सेब, अखरोट और अन्य मेवा फसलों के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके प्रयासों से प्रदेश के फल उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद मिली।
कृषि निर्यात में बृज लाल भट्ट की भूमिका
बृज लाल भट्ट ने कृषि निर्यात से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया। उन्होंने सार्क देशों में जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया। लद्दाख क्षेत्र में बागवानी सर्वेक्षण और नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना भी उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।
उनके कार्यों का लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली। यही कारण है कि उन्हें सामाजिक सेवा और कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है।
पर्यावरण संरक्षण में मोहन नागर का योगदान
मध्य प्रदेश के मोहन नागर लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाई। उनके प्रयासों से कई स्थानीय अभियान बड़े जनआंदोलन के रूप में उभरे।
गंगावतरण अभियान, बोरी बंधान और मचना नदी पुनरुद्धार जैसी पहलें उनके नेतृत्व में सफल हुईं। इन अभियानों ने न केवल जल संकट को कम करने में मदद की, बल्कि समुदायों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने का भी कार्य किया।
शिक्षा और समाज को जोड़ने की पहल
मोहन नागर ने पर्यावरण के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शैक्षणिक जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनका मानना है कि समाज की भागीदारी से ही स्थायी विकास संभव है।
इसलिए, उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और अब उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। यह सम्मान उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो समाज और पर्यावरण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे हैं।