पाकिस्तान में फिर से छाया उदासी का माहौल, भारतीय पायलट की बहादुरी ने रोका बड़ा षड्यंत्र
पाकिस्तान में उदासी का माहौल
फिल्म 'धुरंधर' में एक संवाद है कि 1971 की जंग के बाद पाकिस्तान में एक उदासीनता का माहौल था। अब एक बार फिर ऐसा ही माहौल पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है। इसका एक कारण यह है कि इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिकों ने पायलट स्मित मछार की बहादुरी की सराहना की है। वहीं, भारतीय पायलट ने एक खतरनाक साजिश को अकेले ही नाकाम कर दिया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस घटना में पाकिस्तान का कोई न कोई कनेक्शन जरूर सामने आएगा। इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात से भारतीय पायलट की प्रशंसा सुनकर पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है, जिसके चलते उन्होंने एक बेवकूफी भरा ऐलान कर दिया। इसके साथ ही कुछ भारतीय भी स्मित मछार के पीछे पड़ गए हैं।
साजिश का खुलासा
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दरार डालने की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया है। इस योजना के तहत भारतीय पायलट को मारने की योजना थी और यात्रियों से भरे विमान को इजराइल के किसी शहर में क्रैश करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए कैप्टन स्मित मछार को जिम्मेदार ठहराया जाना था, जबकि ओमान के को-पायलट को हीरो के रूप में पेश किया जाना था। लेकिन यह साजिश सफल नहीं हो पाई, जिसके लिए हम भगवान का धन्यवाद करते हैं।
पाकिस्तान का बेवकूफी भरा बयान
पाकिस्तान के एक सांसद अनवरुल हक ने भारत की तारीफ सुनकर यह दावा किया है कि प्राचीन भारत वास्तव में पाकिस्तान है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सभ्यता की जड़ें 9000 साल पुरानी हैं और हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन सभ्यताएँ पाकिस्तान के इतिहास का हिस्सा हैं। यह बयान इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान ने अपनी ऐतिहासिकता को लेकर कितनी बेवकूफी की है।