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पीओके में हिंसा: प्रदर्शनकारियों पर गोलियों की बौछार, स्थिति गंभीर

पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, जहां प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गई हैं। रावलाकोट में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने हिंसा का सहारा लिया है। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के अनुसार, कई लोगों की जान गई है और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है। प्रदर्शनकारी स्थानीय विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था खत्म करने और बेहतर प्रशासन की मांग कर रहे हैं। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में और क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें।
 

पीओके में बढ़ती हिंसा की घटनाएं

पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से हाल ही में भयानक हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। रावलाकोट की सड़कों पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई गई हैं, जिससे वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा की गई फायरिंग के कारण रावलाकोट की गलियां खून से लाल हो गई हैं।


प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। इस स्थिति के कारण पीओके में हालात अत्यंत गंभीर हो गए हैं। रावलाकोट में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सेना ने हिंसक कार्रवाई की है।


मौतों की संख्या में वृद्धि

जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जैक) के अनुसार, रावलाकोट में गोलीबारी में कम से कम नौ लोगों की जान गई है। हालांकि, कुछ स्थानीय रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई गई है। संगठन ने मृतकों की एक सूची भी जारी की है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।


वहीं, इंटरनेट सेवा को भी कई क्षेत्रों में बंद कर दिया गया है ताकि वहां की जानकारी बाहर न जा सके। पीओके के लोग बता रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे कई लोगों की जान चली गई।


प्रदर्शन का लंबा सिलसिला

यह विरोध प्रदर्शन केवल एक या दो दिन का नहीं है, बल्कि यह जून से चल रहा है। पीओके के लोग लगातार सड़कों पर उतरकर धरने दे रहे हैं, बाजार बंद कर रहे हैं और सार्वजनिक परिवहन ठप कर दिया गया है। यह आंदोलन अब 50 दिनों से अधिक समय से जारी है।


प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था को समाप्त किया जाए और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की जाए। इसके अलावा, बेहतर प्रशासन, सस्ती बिजली और आर्थिक सुधारों की भी मांग की जा रही है।


बातचीत का असफल प्रयास

इस बीच, जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी और प्रशासन के बीच बातचीत हुई, लेकिन यह बेनतीजा रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने न तो गिरफ्तार लोगों को छोड़ने पर सहमति दी और न ही उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।


बातचीत के टूटने के बाद हजारों लोगों ने रावलकोट से मुजफराबाद की ओर मार्च निकाला। हालात बिगड़ने के कारण विधानसभा चुनाव को 10 अगस्त तक टाल दिया गया है। कई राजनीतिक दलों का कहना है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण चुनाव प्रचार प्रभावित हो रहा है और लोगों की प्राथमिकता अब चुनाव नहीं, बल्कि अपनी जान बचाना है।