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पूर्व एथलेटिक ट्रेनर पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, मामला बढ़ता जा रहा है

नॉर्थ कैरोलिना स्टेट विश्वविद्यालय के पूर्व एथलेटिक ट्रेनर रॉबर्ट मर्फी पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। कई पूर्व छात्र-खिलाड़ियों ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं, जो 2013 से शुरू हुईं। इस मामले में अब तक 11 पूर्व खिलाड़ियों ने अपनी आपबीती साझा की है। जांच के दौरान मर्फी ने विश्वविद्यालय छोड़ दिया, लेकिन आरोपों की गंभीरता ने खेल संस्थानों में खिलाड़ियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

यूनिवर्सिटी में विवादित आरोप

अमेरिका के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में एक पूर्व एथलेटिक ट्रेनर के खिलाफ गंभीर आरोपों का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।




जानकारी के अनुसार, नॉर्थ कैरोलिना स्टेट विश्वविद्यालय के पूर्व ट्रेनर रॉबर्ट मर्फी पर कई पूर्व छात्र-खिलाड़ियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। ये आरोप चिकित्सा उपचार के दौरान अनुचित व्यवहार से संबंधित हैं, जिनके बारे में कई खिलाड़ियों ने खुलकर अपनी बात रखी है।




आरोपों के अनुसार, यह घटनाएं 2013 से शुरू हुईं, जब एक खिलाड़ी ने विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और शुरुआती दिनों में ही कथित तौर पर अनुचित व्यवहार का सामना किया। पीड़ितों का कहना है कि उस समय वे पेशेवर प्रशिक्षण के दबाव में थे और दर्द या असहजता को नजरअंदाज कर दिया था।




अब तक लगभग 11 पूर्व खिलाड़ियों ने अपनी आपबीती साझा की है, जिनमें से कई ने अपनी पहचान गुप्त रखी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में एक दीवानी मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें अन्य पूर्व खिलाड़ी भी शामिल हो चुके हैं।




वर्ष 2022 में एक पूर्व खिलाड़ी की शिकायत के बाद यह मामला औपचारिक जांच के दायरे में आया, जिसके बाद मर्फी ने विश्वविद्यालय छोड़ दिया। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले से इन आरोपों की जानकारी थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।




आरोपों में यह भी कहा गया है कि ट्रेनर खिलाड़ियों के निजी क्षेत्रों में अनुचित तरीके से हस्तक्षेप करते थे और कुछ मामलों में उन्हें असामान्य परीक्षण प्रक्रियाओं के दौरान असहज परिस्थितियों में रखा जाता था। मर्फी ने जांच में कहा कि वह खिलाड़ियों को उपचार के लिए बुलाने के लिए लॉकर रूम और स्नान क्षेत्र में जाते थे।




यह मामला फिलहाल सीविल स्तर पर चल रहा है और अभी तक किसी आपराधिक सजा या दोषसिद्धि की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने खेल संस्थानों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।