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पेरिस में भारतीय युवक को बच्चों के उत्पीड़न के मामले में 20 साल की सजा

पेरिस में एक भारतीय युवक को बच्चों के उत्पीड़न के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई है। यह मामला एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा है, जो बच्चों को हिंसक और यौन गतिविधियों में शामिल करता था। जानें इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे के तथ्यों के बारे में।
 

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में संलिप्तता

एक भारतीय युवक को पेरिस में शुक्रवार को 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह सजा अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में बच्चों के उत्पीड़न से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में उसकी संलिप्तता के लिए दी गई है। इस नेटवर्क पर आरोप है कि यह बच्चों को हिंसक और यौन गतिविधियों वाले वीडियो बनाने के लिए मजबूर करता था। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, बाल पीड़ितों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 'डिस्कॉर्ड' के माध्यम से इस नेटवर्क में शामिल किया गया, जिससे उन्हें 'सीवीएलटी' नामक समूह का 'गुलाम' बनाया गया।


गिरफ्तारी और सजा

इस समूह के तीन अन्य सदस्यों को अमेरिका में गिरफ्तार किया जा चुका है। वकील हिप्पोलिट मारकेटी, जो अमेरिका के पांच पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने बताया कि 29 वर्षीय रोहन राणे को नाबालिग से यौन उत्पीड़न और यातना देने के आरोप में दोषी पाया गया। राणे को अधिकतम सजा के तहत 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई।


मुकदमे की संवेदनशीलता

अदालत में उपस्थित लोगों के अनुसार, जब राणे को दोषी ठहराए जाने का फैसला सुनाया गया, तब उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायाधीशों ने मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में करने का आदेश दिया था। अमेरिकी अधिकारियों से मिली सूचना के आधार पर, 2021 में फ्रांस के एंटीब में राणे को गिरफ्तार किया गया था।


पीड़ितों का दर्द

वकील मारकेटी ने कहा, "पीड़ितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनकी जिंदगी पूरी तरह बिखर गई है।" राणे के वकील ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया। राणे, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे का निवासी है, उस समय फ्रांस में पढ़ाई कर रहा था।


प्रत्यर्पण की प्रक्रिया

फ्रांसीसी अधिकारियों ने राणे के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही पूरी करने के बाद ही प्रत्यर्पण पर विचार करने का निर्णय लिया है।