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प्रयागराज में UGC नियमों पर सवाल पूछने पर युवा को थप्पड़, लोकतंत्र पर उठे सवाल

प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की उपस्थिति में एक युवा ने UGC के नए नियमों पर सवाल उठाया, जिसके बाद भाजपा पार्षद द्वारा उसे थप्पड़ मारा गया। इस घटना ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है, जहां यूजर्स ने सत्ता के अहंकार और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अब अपराध बन गया है? जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

प्रयागराज में विवादास्पद घटना

प्रयागराज। यूपी के प्रयागराज जिले में बीते रविवार को परेड ग्राउंड में आयोजित प्रबुद्ध महाकुम्भ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या शामिल हुए। इस दौरान, एक युवा रोहित तिवारी ने उनसे UGC के नए नियमों और आरक्षण पर सवाल किया। इस सवाल पर भाजपा पार्षद विनय मिश्रा उर्फ सिंटू ने युवक को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

क्या अब भारत के लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना भी अपराध हो गया है? क्या संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब सत्ताधारी दल की अनुमति से चलेगी?
प्रयागराज में परशुराम सेना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में, जिसमें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को आमंत्रित किया गया था, रोहित तिवारी सहित सामान्य वर्ग के पाँच युवाओं के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की घटना लोकतंत्र के माथे पर कलंक है। आरोप है कि इन युवाओं का अपराध केवल इतना था कि उन्होंने UGC बिल को लेकर सवाल उठाने का साहस किया। यदि सत्ता के किसी प्रतिनिधि से सवाल पूछने पर युवाओं को पीटा जाए, उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाए और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, तो यह कानून का शासन नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार का प्रदर्शन है!

— Adv. Anil Mishra (@Adv_Anil_Mishra) November 2, 2026


सवाल पूछने पर हिंसा का विरोध

क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना अपराध है?

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस घटना की निंदा की है। एक यूजर ने लिखा कि क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना अपराध है? यदि कोई नागरिक अपने अधिकारों पर सवाल उठाता है, तो क्या उसे थप्पड़ मारा जाएगा? सवालों का जवाब तर्क से दिया जाना चाहिए, न कि हिंसा से।


सत्ता का अहंकार और जनता का अधिकार

यूजर्स ने कहा कि सवाल पूछने पर थप्पड़ मारना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। लोकतंत्र में असहमति और सवालों का स्वागत होना चाहिए, न कि डर और हिंसा का। जब पुलिस ने थप्पड़ मारने वाले को छोड़कर सवाल पूछने वाले युवक को गिरफ्तार किया, तो यह स्थिति और भी चिंताजनक हो गई।


ब्राह्मण समाज की आवाज़

एक यूजर ने लिखा कि जब ब्राह्मण समाज अपने अधिकारों पर सवाल उठाता है, तब उसे अपमानित किया जाता है। चुनाव के समय इन्हीं नेताओं को ब्राह्मणों का समर्थन याद आता है। यह दोहरा व्यवहार कब तक सहन किया जाएगा? लोकतंत्र में जनता मालिक है और नेता जनता के प्रतिनिधि हैं। सवाल पूछने पर थप्पड़ नहीं, बल्कि जवाब मिलना चाहिए।