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फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने सोनम वांगचुक की सेहत पर चिंता जताई

लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। इस पर अभिनेत्री फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। फातिमा ने सरकार से अपील की है कि सोनम जी की सेहत को ध्यान में रखते हुए जल्द ही कोई समाधान निकाला जाए। वहीं, श्वेता ने इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई है। जानें इन दोनों अभिनेत्रियों के विचार और सोनम वांगचुक के संघर्ष के बारे में।
 

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और स्वास्थ्य पर चिंता

मुंबई: लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं, जिसके कारण उनका वजन लगभग 8.5 किलो घट गया है। इस स्थिति को देखते हुए कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हाल ही में, अभिनेत्री फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय साझा की।


फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "सोनम वांगचुक जी के अनशन को आज 19 दिन हो गए हैं। हमें उनकी सेहत बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सोनम जी ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्हें अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए इस तरह अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।"


अभिनेत्री ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा, "राजनीति को अलग रखते हुए, हमारे युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना सबसे महत्वपूर्ण है। सोनम जी को इस तरह कमजोर होते देखना बहुत दुखद है। मुझे उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालेगी। आज के युवा ही हमारे देश का भविष्य हैं, और हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।"


श्वेता तिवारी ने कहा, "सोनम वांगचुक जी शिक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।"


उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सीजेपी पार्टी से कोई संबंध नहीं है और कहा, "सीजेपी इस मामले को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। मैं इस तरीके का समर्थन नहीं करती। मेरा समर्थन केवल सोनम वांगचुक और उनके मुद्दे के लिए है, न कि किसी राजनीतिक संगठन के लिए।"


अंत में, उन्होंने लिखा, "हमारे राजनीतिक विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हमें ऐसे व्यक्ति को खोने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए जिसने अपने जीवन को देश और शिक्षा के लिए समर्पित किया है। हमें उनके संदेश, उनकी सेहत और इस समस्या के सही समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"