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फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शन से बढ़ा सरकार पर दबाव

फ्रांस में छात्रों ने शिक्षा के लिए अधिक धन की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया है, जिसमें 2.5 लाख से अधिक लोग शामिल हुए। पेरिस और अन्य शहरों में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। छात्रों की शिकायतों में जर्जर कक्षाएं और कर्मचारियों की कमी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों की चिंताओं को सुनने का आश्वासन दिया है। जानें इस आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

फ्रांस में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन

पेरिस, 7 अक्टूबर (एपी) - शिक्षा के लिए अधिक वित्तीय सहायता की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में मंगलवार को फ्रांस भर में 2.5 लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शन किया। पेरिस और अन्य शहरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 2.66 लाख प्रदर्शनकारियों में से 56 हजार पेरिस में थे। इन प्रदर्शनों ने निवर्तमान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।


छात्रों द्वारा हाई स्कूलों की नाकेबंदी के बीच, मार्सेय, स्ट्रासबर्ग और अन्य शहरों में बड़ी संख्या में लोग झंडे और तख्तियां लेकर एकत्र हुए। यह आंदोलन, जो सितंबर के मध्य में पेरिस क्षेत्र के एक हाई स्कूल से शुरू हुआ था, अब पूरे देश में फैल चुका है। गृह मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया। छात्रों की गिरफ्तारी और आंसू गैस तथा दंगा-रोधी हथियारों के उपयोग से अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।


कुछ छात्र संगठनों ने बृहस्पतिवार को नए प्रदर्शनों का आह्वान किया है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्तियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार और स्कूल प्रशासन को छात्रों की चिंताओं को सुनकर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने स्कूलों में होने वाली 'अत्यधिक हिंसा' की निंदा की और पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई किसी भी 'दुर्घटना' की जांच का आश्वासन दिया।


छात्रों ने जर्जर कक्षाओं की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जैसे मेज और कुर्सियां। गर्मियों में एयर कंडीशनिंग की कमी के कारण ये कक्षाएं अत्यधिक गर्म हो जाती हैं और कुछ स्थानों पर चूहों का प्रकोप भी है। छात्रों की अन्य शिकायतों में कर्मचारियों की कमी और अत्यधिक कार्यभार शामिल हैं।


शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों की शिकायतों और उनके सुझाए गए सुधारों को जानने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। पड़ोसी देश बेल्जियम में भी छात्रों ने प्रदर्शन किए, जहां लीज में 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।