बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पुलिस की जागरूकता मुहिम
ऑनलाइन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा
ऑनलाइन अपराध चेतावनी: पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी, हेमेन्द्र कुमार मीणा, आईपीएस के नेतृत्व में, रेवाड़ी पुलिस बच्चों को ऑनलाइन अपराधों से बचाने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान चला रही है।
डिजिटल युग में, जहां सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और विभिन्न इंटरनेट प्लेटफॉर्म बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं, वहीं इनसे जुड़े साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से ऑनलाइन दोस्ती और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसी गतिविधियां बच्चों की मानसिक, सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं।
रेवाड़ी पुलिस आम जनता, अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों को जागरूक करने के लिए स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक मंचों पर साइबर सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया के जरिए भी सुरक्षा संबंधी संदेश फैलाए जा रहे हैं, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी हर परिवार तक पहुंच सके।
ऑनलाइन ग्रूमिंग क्या है?
ऑनलाइन ग्रूमिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें अपराधी फर्जी पहचान बनाकर नाबालिग बच्चों से संपर्क करते हैं। शुरुआत में वे मित्रता का दिखावा कर बच्चों का विश्वास जीतते हैं। धीरे-धीरे बातचीत को निजी विषयों की ओर मोड़ते हैं और 'यह बात सीक्रेट रहेगी' जैसे बहाने बनाकर निजी फोटो या वीडियो मांगते हैं। कई मामलों में, भावनात्मक दबाव डालकर बच्चों को डराया या ब्लैकमेल किया जाता है, ताकि वे इस बारे में किसी को न बताएं।
अभिभावकों के लिए आवश्यक संदेश
रेवाड़ी पुलिस आम जनता से अपील करती है कि:
बच्चों को ऑनलाइन किसी भी अजनबी से दूरी बनाए रखने और व्यक्तिगत फोटो, वीडियो या जानकारी साझा न करने की सलाह दें। यदि कोई व्यक्ति बातचीत को गोपनीय रखने या परिवार से छिपाने की बात करे, तो उसे तुरंत ब्लॉक करें और इसकी सूचना अभिभावकों को दें। घर का पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर, पासवर्ड या अन्य निजी जानकारी इंटरनेट पर साझा करने से बचें। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो संवेदनशीलता से उनसे बात करें और उनकी समस्या समझने का प्रयास करें। बच्चों के साथ ऐसा विश्वासपूर्ण वातावरण बनाएं कि वे किसी भी असहज स्थिति को तुरंत साझा कर सकें।
पुलिस अधीक्षक का संदेश
पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी, हेमेन्द्र कुमार मीणा ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर सकारात्मक निगरानी रखें, साथ ही उनके साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। डर या डांट की बजाय समझाइश और विश्वास का वातावरण बच्चों को सुरक्षित रखने में अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।
उन्होंने आम जनता से आग्रह किया कि यदि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी, ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं अथवा नजदीकी पुलिस स्टेशन में सूचना दें। समय पर सूचना देने से त्वरित कार्रवाई संभव होती है और अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
रेवाड़ी पुलिस समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपेक्षा करती है और आश्वस्त करती है कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए हरसंभव प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।