×

बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस को मुस्लिम लीग से जोड़ा, असम में चुनावी समीकरण पर चर्चा

बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है, जो असम में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है। कांग्रेस ने 126 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें जीतीं, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम विधायकों की हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर हिंदू विरोधी राजनीति का आरोप लगाया है। इस लेख में असम के चुनावी परिणाम, कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों और बदरुद्दीन अजमल की टिप्पणियों पर चर्चा की गई है। क्या कांग्रेस असम के मुस्लिम वोटरों को साधने में सफल हो पाएगी? जानें इस लेख में।
 

कांग्रेस और मुस्लिम लीग की तुलना

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है। असम में कांग्रेस के विजयी विधायकों की संख्या इस बात का संकेत देती है कि अजमल ने ऐसा क्यों कहा, जबकि वह स्वयं मुसलमानों की राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस की अल्पसंख्यक राजनीति अब कई राज्यों में उसके लिए चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही है।


भाजपा का दृष्टिकोण

भारतीय जनता पार्टी ने यह संदेश फैलाने में सफलता पाई है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी राजनीति कर रही है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक, कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। चुनाव परिणाम भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब कांग्रेस के पास केवल अल्पसंख्यक वोटर बचे हैं, जबकि बहुसंख्यक हिंदू समुदाय भाजपा या अन्य दलों की ओर बढ़ रहा है।


कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवार

कांग्रेस ने असम की 126 विधानसभा सीटों में से 20 से अधिक सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 31 प्रतिशत है। कांग्रेस ने भाजपा की हिंदुत्व राजनीति की आलोचना की, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया।


कांग्रेस को असम में 29 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जिसमें से 19 विधायक जीते, जिनमें से 18 मुस्लिम हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की दो सीटें आईं, और दोनों विधायक मुस्लिम हैं। तमिलनाडु में एक मुस्लिम विधायक है, जबकि केरल में 7 से अधिक मुस्लिम विधायक हैं।


असम में जीते हुए मुस्लिम विधायकों की सूची


  • परबतझोरा: एमडी अशरफुल इस्लाम शेख

  • गौरीपुर: अब्दुस सोबहान अली सरकार

  • धुबरी: बेबी बेगम

  • वीरसिंह जरुआ: वाजेद अली चौधरी

  • मनकाचार: मोहिबुर रहमान (बप्पी)

  • जलेश्वर: आफताब उद्दीन मुल्ला

  • गोवालपाड़ा ईस्ट: अबुल कलाम राशिद आलम

  • श्रीजनग्राम: एमडी. नुरुल इस्लाम

  • चेंगा: अब्दुर रहीम अहमद

  • पाकाबेटबाड़ी: जाकिर हुसैन सिकदार

  • चामरिया: रेकीबुद्दीन अहमद

  • लहरीघाट: डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर

  • रूपहीहाट: नुरुल हुदा

  • समागुरी: तंजील हुसैन

  • सोनाई: अमीनुल हक लस्कर

  • अलगापुर-कटलीचेरा: जुबैर अनाम मजूमदार

  • करिमगंज नॉर्थ: जाकारिया अहमद

  • करिमगंज साउथ: अमीनुर राशिद चौधरी


कांग्रेस की मुस्लिम लीग से तुलना

बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की मुस्लिम लीग से तुलना की है, जो दिलचस्प है। अजमल को कांग्रेस ने हमेशा भाजपा की बी टीम बताया है। चुनावों में कांग्रेस ने बार-बार कहा कि अजमल सांप्रदायिक राजनीति करते हैं, जो हिंदू ध्रुवीकरण में मदद करती है। यह स्थिति उनके लिए असहज है, क्योंकि वे एक चुनाव पूर्व कांग्रेस के साथ गठबंधन में थे।


अजमल अल्पसंख्यक बांग्ला भाषी मुसलमानों के नेता हैं और अब कांग्रेस ने उनके वोट बैंक में सेंध लगाई है। असम कांग्रेस को अल्पसंख्यकों का समर्थन मिला है, लेकिन 20 से अधिक मुस्लिम उम्मीदवारों की उपस्थिति ने हिंदू वोटरों को निराश किया है।


क्या कांग्रेस असम के मुस्लिमों को साधने में सफल रही?

2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल जनसंख्या में 35 प्रतिशत मुसलमान हैं। विधानसभा की 126 सीटों में से 30 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर जीत-हार तय करते हैं। कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं, जबकि AIUDF ने दो सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर 10 से अधिक सीटों का नुकसान हुआ।


कांग्रेस ने चुनाव में दमखम दिखाया, लेकिन ओवैसी और अजमल के प्रभाव ने नुकसान भी पहुँचाया।


कांग्रेस के हिंदू उम्मीदवारों की हार का कारण

असम में भाजपा ने घुसपैठ को चुनावी मुद्दा बनाया। कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि वह घुसपैठियों को शरण देती है और मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती है। हिमंता बिस्व सरमा ने सार्वजनिक सभाओं में बार-बार कहा कि असम की जनसंख्या असंतुलित हो रही है।


उन्होंने कहा कि मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही है, जबकि हिंदुओं की नहीं। असम में जनसांख्यिकी असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। केंद्रीय गृहमंत्री और अन्य नेताओं ने बार-बार कहा कि धुबरी, बारपेटा, दरांग, और अन्य जिलों में घुसपैठियों की संख्या बढ़ गई है।