बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की जीत और निर्दलीय उम्मीदवारों की हार
बांकीपुर उपचुनाव में दिलचस्प मुकाबला
पटना: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि कुछ अजीब नामों के कारण भी चर्चा का विषय बना। मतदाता जब ईवीएम पर लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के नाम देख रहे थे, तो वे चौंक गए। हालांकि, ये नाम बिहार के प्रमुख नेताओं के नहीं, बल्कि दो निर्दलीय उम्मीदवारों के थे। चुनाव परिणामों के बाद, दोनों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और वे अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।
निर्दलीय उम्मीदवारों की हार
निर्दलीय उम्मीदवार लालू प्रसाद यादव को केवल 81 वोट मिले, जो कि 0.06 प्रतिशत के बराबर है। वहीं, दूसरे निर्दलीय प्रत्याशी नीतीश कुमार को 149 वोट मिले, जो कुल मतदान का महज 0.11 प्रतिशत है। दोनों ही उम्मीदवार 150 वोट का आंकड़ा पार नहीं कर सके।
जमानत की समस्या
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार को अपनी जमानत बचाने के लिए कुल वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त करना आवश्यक है। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार इस न्यूनतम सीमा से काफी पीछे रह गए, जिससे उनकी जमानत जब्त हो गई और राशि सरकारी खजाने में चली जाएगी।
प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत
बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट प्राप्त कर भाजपा के नीरज कुमार को 19,324 मतों से हराया। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का गढ़ रहा है।
आरजेडी को झटका
राष्ट्रीय जनता दल ने इस बार रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया था, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थीं। लेकिन इस बार उन्हें केवल 14,273 वोट मिले, जिससे वह काफी पीछे रह गईं। चुनाव परिणाम ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा को जन्म दिया है।
कम मतदान का मुद्दा
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में 30 जुलाई को मतदान हुआ, जिसमें लगभग 3.8 लाख मतदाता थे। इस बार मतदान प्रतिशत 34.30 प्रतिशत रहा, जो 2025 के विधानसभा चुनाव के 41.45 प्रतिशत से काफी कम है। फिर भी, परिणाम ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा संदेश दिया है।