बांग्लादेश ने अमेरिका से रूसी डीजल खरीदने की मांगी छूट
बांग्लादेश ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि उसे रूस से डीजल खरीदने की स्थायी छूट दी जाए, जैसा कि भारत को मिली थी। ऊर्जा संकट के चलते बांग्लादेश को अपनी 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस स्थिति में, बांग्लादेश ने अमेरिका को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें उसने 6 लाख मीट्रिक टन डीजल की आवश्यकता बताई है। यह कदम न केवल बांग्लादेश के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Apr 1, 2026, 17:39 IST
बांग्लादेश की ऊर्जा संकट की गुहार
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। इस संकट से हर देश प्रभावित है, और बांग्लादेश ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि उसे भी रूस से डीजल खरीदने की अनुमति दी जाए, जैसे भारत को मिली थी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। बांग्लादेश, जो अपनी 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, अब सस्ती और स्थिर ऊर्जा की आपूर्ति बनाए रखने में कठिनाई का सामना कर रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, बांग्लादेश ने अमेरिका को एक औपचारिक पत्र भेजकर रूसी डीजल खरीदने के लिए स्थायी छूट मांगी है। उसने स्पष्ट किया कि जिस तरह भारत को 30 दिन की छूट दी गई थी, उसी तरह उसे भी राहत दी जाए। बांग्लादेश का तर्क सीधा है: यदि एक सहयोगी देश को छूट मिल सकती है, तो उसे क्यों नहीं?
बांग्लादेश की आवश्यकताएँ
बांग्लादेश ने यह भी बताया कि उसे कम से कम 2 महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 6 लाख मीट्रिक टन डीजल की आवश्यकता है, जिसे वह रूस से खरीदना चाहता है। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव अमेरिका के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और अब उत्तर की प्रतीक्षा की जा रही है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बांग्लादेश को ईंधन की राशनिंग तक लागू करनी पड़ी है। हालांकि ईद के दौरान कुछ राहत दी गई, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। सरकार हर संभव विकल्प तलाश रही है, चाहे वह रूस हो, मध्य एशिया के देश हों या फिर अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे सप्लाई स्रोत। साथ ही, बांग्लादेश अपने मौजूदा साझेदारों से भी सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उदाहरण के लिए, वह भारत की नुमालीगन रिफाइनरी लिमिटेड से डीजल आयात बढ़ाने की योजना बना रहा है। लेकिन यह कदम केवल अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है, स्थायी समाधान नहीं।
समस्या की जड़
इस समस्या की जड़ स्टेट ऑफ हुर्मस में है, जो वैश्विक तेल सप्लाई का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान से जुड़े तनाव के कारण यहां आवाजाही काफी सीमित हो गई है, जिससे पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है। बांग्लादेश की अपील केवल एक देश की मांग नहीं है, बल्कि उन सभी आयात निर्भर देशों की आवाज है जो वैश्विक राजनीति और संघर्ष के बीच फंसे हुए हैं। अब यह देखना है कि अमेरिका इस अनुरोध पर क्या निर्णय लेता है, क्योंकि इससे न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा।