बालाघाट में कुएं में जहरीली गैस से दो लोगों की मौत, सुरक्षा की कमी पर उठे सवाल
दर्दनाक हादसा बालाघाट में
बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक दुखद घटना ने पूरे गांव को शोक में डाल दिया है। किरनापुर थाना क्षेत्र के पिपरटोला गांव में गुरुवार शाम एक व्यक्ति की मौत उस समय हो गई जब वह खराब मोटर को ठीक करने कुएं में उतरा। जहरीली गैस के प्रभाव में आने से उसकी जान चली गई। उसे बचाने के लिए कुएं में उतरे उसके मित्र की भी इसी कारण से मौत हो गई।
घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, पिपरटोला के निवासी महेश चौधरी (45) और उनके मित्र युवराज बिसेन (55) ने गुरुवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे एक 50 फीट गहरे कुएं में मोटर ठीक करने का निर्णय लिया। कुछ समय बाद, जहरीली गैस के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए।
दोनों की मौत का कारण
महेश को बाहर नहीं आते देख युवराज ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी जहरीली गैस के संपर्क में आ गए। दोनों की सांसें थम गईं।
रेस्क्यू ऑपरेशन
एसडीईआरएफ की टीम ने किया रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलने पर किरनापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन जहरीली गैस के खतरे के कारण तुरंत रेस्क्यू शुरू नहीं किया जा सका। बाद में बालाघाट से एसडीईआरएफ की टीम को बुलाया गया।
रात में शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में एसडीईआरएफ के जवानों ने ऑक्सीजन सिलेंडर और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हुए कुएं में उतरकर दोनों शवों को बाहर निकाला। यह प्रक्रिया लगभग पांच घंटे तक चली।
मौत का कारण और सुरक्षा की आवश्यकता
जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी
थाना प्रभारी राजकुमार चौधरी ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण कुएं में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंद स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतरना बेहद खतरनाक हो सकता है। कुएं, सेप्टिक टैंक या अन्य बंद जगहों में जाने से पहले गैस की जांच और ऑक्सीजन स्तर की निगरानी आवश्यक है।