बिंज वॉचिंग का युवाओं पर मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
बिंज वॉचिंग और मानसिक स्वास्थ्य
पटियाला: डिजिटल युग में स्मार्टफोन और स्क्रीन पर लगातार वीडियो देखने की आदत युवाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बनती जा रही है। मनोरंजन के उद्देश्य से शुरू होने वाली यह आदत कब लत में बदल जाती है, इसका पता ही नहीं चलता। पंजाबी यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बिंज वॉचिंग (लगातार वीडियो देखना) सीधे तौर पर अनिद्रा और मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट से जुड़ी हुई है।
यह महत्वपूर्ण अध्ययन मनोविज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. अमृत कौर हांस ने प्रो. हरप्रीत कौर के मार्गदर्शन में किया। इस शोध में पंजाब के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले 18 से 25 वर्ष के छात्रों को शामिल किया गया। प्रारंभ में 1170 प्रतिभागियों का डेटा एकत्र किया गया, जिसके बाद मानकों पर खरे उतरे 668 युवाओं के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि वीडियो देखना भले ही प्रारंभ में सुकून देता हो, लेकिन अनियंत्रित होने पर यह नींद के चक्र को बिगाड़ देता है और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
शोध रिपोर्ट के अनुसार, बिस्तर पर लेटकर घंटों तक ऑनलाइन सामग्री देखना और समय पर सोने में असमर्थता युवाओं में तनाव और अस्वस्थता का मुख्य कारण बन रहा है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब युवाओं को यह एहसास नहीं होता कि उनकी यह आदत उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव डाल रही है। मनोविज्ञान में इसे सजगता या माइंडफुलनेस की कमी कहा जाता है। इसके अलावा, वर्चुअल दुनिया में डूबे रहने के कारण युवाओं में अकेलापन और वास्तविक सामाजिक संपर्कों से अलगाव की भावना बढ़ रही है, जो उनकी मानसिक शांति को प्रभावित कर रही है।
प्रो. हरप्रीत कौर ने इस शोध के दौरान युवाओं को डिजिटल माध्यमों के उपयोग में संतुलन साधने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए सोने का एक निश्चित समय निर्धारित करना, रात को गैजेट्स से दूरी बनाना और वास्तविक जीवन में लोगों से मिलना-जुलना बेहद जरूरी है। पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने इस अध्ययन के लिए डॉ. अमृत कौर हांस और प्रो. हरप्रीत कौर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मीडिया और डिजिटल उपकरणों के बेलगाम इस्तेमाल से जुड़े मनो-सामाजिक प्रभाव युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में यह शोध समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।