बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य का तीखा बयान, पारिवारिक तनाव की ओर इशारा
पटना में पारिवारिक और राजनीतिक तनाव का खुलासा
पटना: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भीतर पारिवारिक और राजनीतिक तनाव एक बार फिर से उजागर हुआ है। आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक और तीखा पोस्ट साझा किया है, जिसे उनके भाई तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला माना जा रहा है। रोहिणी ने बिना किसी का नाम लिए लिखा कि जब अहंकार हावी होता है और गलत सलाह मिलती है, तो इंसान अपनी पहचान और विरासत को मिटाने लगता है।
उन्होंने कहा कि किसी महान विरासत को समाप्त करने के लिए बाहरी लोगों की आवश्यकता नहीं होती, अपने ही लोग काफी होते हैं। रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह बेहद चौंकाने वाला होता है जब वे लोग, जिनकी पहचान और अस्तित्व एक विरासत से जुड़ा है, उसी विरासत के निशान मिटाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब समझ पर पर्दा पड़ जाता है और घमंड सोच पर हावी हो जाता है, तब विनाशकारी ताकतें इंसान के फैसलों को नियंत्रित करने लगती हैं।
क्या संकेत दे रहे हैं उनके शब्द?
रोहिणी के इन शब्दों को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी की हार से जोड़ा जा रहा है। चुनाव में आरजेडी को बड़ा झटका लगा था और पार्टी 140 से अधिक सीटों पर लड़ने के बावजूद केवल 25 सीटें जीत पाई। एनडीए ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जिसमें बीजेपी और जेडीयू को बड़ी सफलता मिली। कांग्रेस और वाम दलों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी खाता तक नहीं खोल सकी।
रोहिणी आचार्य ने राजनीति क्यों छोड़ी?
चुनावी हार के एक दिन बाद, रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से संबंध तोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें अपमानित किया गया। रोहिणी ने यह भी कहा कि उन्हें उनके ही परिवार ने घर और पहचान से दूर कर दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में खुद को अनाथ बताया और अपनी पीड़ा को सार्वजनिक किया।
रोहिणी के आरोप
रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता के लिए किडनी दान करने को लेकर भी उन्हें अपमान सहना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके बलिदान को गलत तरीके से पेश किया गया और इस पर सवाल उठाए गए। उनका यह बयान बिहार की राजनीति में आरजेडी के भीतर गहरे मतभेद और पारिवारिक कलह की ओर इशारा करता है, जिससे आने वाले समय में पार्टी की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।