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बिहार चुनाव हार के बाद कांग्रेस में बढ़ती असंतोष और गुटबाजी

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में असंतोष और गुटबाजी की स्थिति उभरकर सामने आई है। मधुबनी में हुई एक समीक्षा बैठक में टिकट वितरण को लेकर विवाद बढ़ गया, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट की स्थिति उत्पन्न हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी और समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के कारण।
 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष का उभार


पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में असंतोष और आंतरिक गुटबाजी की स्थिति स्पष्ट हो गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं से हार के कारणों की जानकारी लेने और सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपसी कलह ने पार्टी की संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मधुबनी में समीक्षा बैठक का हंगामा

हाल ही में मधुबनी जिले में विधानसभा चुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन जैसे ही टिकट वितरण और रणनीति पर चर्चा शुरू हुई, माहौल गरमाने लगा। कुछ नेताओं ने टिकट बंटवारे में गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाए, जिससे बैठक का माहौल बिगड़ने लगा।


बहस से हिंसा तक का सफर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोप-प्रत्यारोप के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुट आमने-सामने आ गए। कुछ ही समय में धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। बैठक स्थल पर अफरातफरी का माहौल बन गया।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस घटना को बैठक में मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, और यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी की हार के बाद इस तरह का टकराव कांग्रेस के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है।


वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी

इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान भी उपस्थित थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब बैठक में हंगामा हो रहा था, तब दोनों नेता अपनी सीटों पर बैठे रहे। समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण विवाद बढ़ गया। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर हस्तक्षेप किया जाता, तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं।


पार्टी में असंतोष की बढ़ती लहर

घटना के बाद शकील अहमद खान ने कहा कि यह गंभीरता से विचार करने का विषय है कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है और समीक्षा बैठकों का उद्देश्य आत्ममंथन होना चाहिए, न कि आपसी टकराव। बिहार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पहले से ही दबाव में है, और मधुबनी की यह घटना पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।