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बिहार में पीएम मोदी और नीतीश कुमार की दोस्ती का एक यादगार पल

पटना के गांधी मैदान में सम्राट चौधरी की नई सरकार के विस्तार समारोह में पीएम मोदी और नीतीश कुमार के बीच एक यादगार पल देखने को मिला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को मंच पर बुलाया। दोनों नेताओं के बीच की गर्मजोशी और दोस्ती ने सभी का ध्यान खींचा। जानें इस घटना के पीछे की कहानी और लोगों की प्रतिक्रियाएं।
 

सम्राट चौधरी की नई सरकार का विस्तार समारोह


पटना के गांधी मैदान में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर एक बार फिर से राजनीति के एक महत्वपूर्ण क्षण को कैमरे में कैद किया गया। मंच पर प्रधानमंत्री मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य प्रमुख नेता उपस्थित थे। लेकिन प्रधानमंत्री की नजरें अपने पुराने मित्र को खोज रही थीं।


वीडियो में नीतीश कुमार का आना

जब पीएम मोदी मंच पर खड़े थे, तब सभी नेता उनके पास ग्रुप फोटो के लिए आना चाहते थे। लेकिन प्रधानमंत्री ने दूर खड़े अपने पुराने मित्र और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इशारा करके बुला लिया। इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


नीतीश और मोदी की केमिस्ट्री

लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं, जिसमें नीतीश कुमार पीएम मोदी से थोड़ी दूरी पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बगल में खड़े थे। पीएम मोदी ने उन्हें इशारा करके अपने पास बुलाया। जब नीतीश कुमार पास आए, तो दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और नीतीश ने पीएम मोदी के कंधे पर हाथ रखकर उनका अभिवादन किया। यह क्षण सभी का ध्यान खींचने में सफल रहा। नीतीश कुमार इस दौरान थोड़े भावुक भी नजर आए। राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसे औपचारिक शिष्टाचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बताया।


दोस्ती का प्रतीक

मोदी और नीतीश की यह केमिस्ट्री केवल बिहार की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्र की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समय-समय पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद भी सामने आए हैं, लेकिन अंततः उन्होंने एक मंच पर खड़े रहने का निर्णय लिया। इस घटना पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। एक यूजर ने वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएम मोदी के कंधे पर हाथ रखने की हिम्मत केवल नीतीश कुमार में है। इस घटना ने साबित कर दिया कि राजनीति में भी दोस्ती संभव है।