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बिहार में राजनीतिक सुरक्षा विवाद: तेजस्वी यादव ने लौटाई सरकारी सुरक्षा

बिहार में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जब तेजस्वी यादव ने अपने माता-पिता की सुरक्षा हटाए जाने के बाद अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी। आरजेडी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया है, जबकि राज्य सरकार ने आरोपों को खारिज किया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
 

बिहार में सुरक्षा विवाद गहराया


पटना: बिहार में राजनीतिक स्थिति में तनाव बढ़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद, उनके बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस ले ली है। इस निर्णय ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज कर दिया है।


तेजस्वी यादव ने सुरक्षा वापस की

आरजेडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। पार्टी का कहना है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उठाया गया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके परिवार की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।


लालू-राबड़ी की सुरक्षा में कटौती से विवाद बढ़ा

शुक्रवार को सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटा दी गई थी। अब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बिहार पुलिस को सौंप दी गई है। आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि लालू यादव एक राष्ट्रीय नेता हैं और उनके साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।


तेजस्वी की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष है। तेजस्वी लगातार जनसभाओं और राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा आवश्यक मानी गई है। फिर भी, उन्होंने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए अपनी सुरक्षा वापस कर दी।


आरजेडी का कहना है कि जब माता-पिता की सुरक्षा में कटौती हो रही है, तो बेटे के रूप में वे भी इसका विरोध करते हैं। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।


सरकार का स्पष्टीकरण

वहीं, राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किसी राजनीतिक निर्णय के तहत नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा और मानकों के आधार पर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि खतरे के आकलन के बाद ही सुरक्षा श्रेणी निर्धारित की जाती है।