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ब्यास नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा उपायों में तेजी

ब्यास नदी के किनारे बाढ़ से सुरक्षा के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं। जल संसाधन मंत्री ने विधानसभा में बताया कि 32.09 करोड़ रुपये के कार्य किए गए हैं, जिनमें से कई पूरे हो चुके हैं। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है और कटाव रोकने के लिए तटबंधों को मजबूत किया गया है। मनरेगा के तहत भी सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है।
 

बाढ़ से सुरक्षा के लिए तैयारियां

ब्यास नदी के किनारे स्थित गांवों और किसानों के लिए बाढ़ से बचाव की तैयारियों को तेज किया गया है। सरकार ने अमृतसर रोड पर ब्यास पुल से हरिके पत्तन तक संवेदनशील क्षेत्रों की जांच के बाद सुरक्षा कार्यों को शुरू किया है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में जानकारी दी कि इस क्षेत्र में 32.09 करोड़ रुपये के कार्य किए गए हैं, जिनमें से 12 कार्य पूरे हो चुके हैं और एक कार्य अभी जारी है।


संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान

सर्वेक्षण के बाद अमृतपुर, भरौआणा, शेख मांगा, सरूपवाल, भागो, आलूवाल, लोधीवाल, यूसफपुर दरवाल, और तकिया जैसे कई स्थानों को संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया गया है। अधिकारियों की समितियों ने मौके पर निरीक्षण कर तकनीकी उपायों को निर्धारित किया। विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह ने विधानसभा में किसानों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।


कटाव रोकने के लिए तटबंधों को मजबूत किया गया

अमृतपुर राजेवाल में कटाव को रोकने के लिए स्टड, रिवेटमेंट और स्पर का निर्माण किया गया है। कपूरथला में बाएं किनारे के बाढ़ जोखिम को कम करने का कार्य पूरा हो चुका है। गोइंदवाल, वैरोवाल और गाइड बांधों को भी मजबूत किया गया है। 2025 की बाढ़ से प्रभावित एडवांस बांध नंबर दो और सुज्जो कालिया एडवांस बांध की बहाली का कार्य भी पूरा हो गया है।


मनरेगा के तहत सुरक्षा कार्य

ढिलवां में क्षतिग्रस्त ढलानों को मजबूत किया गया है, जबकि घड़का में दोनों किनारों पर रिवेटमेंट का कार्य पूरा हो चुका है। मरड़ में दाएं किनारे पर 360 फुट लंबा रिवेटमेंट अभी निर्माणाधीन है। मनरेगा के तहत 11.98 करोड़ रुपये खर्च कर आहली कलां, आहली खुर्द, सफदरपुर खिजरपुर और घड़का के आसपास बाढ़ और कटावरोधी कार्य किए गए हैं।


पिछले पांच बाढ़ सीजन में बांधों की सुरक्षा

मंत्री के अनुसार, पिछले पांच बाढ़ सीजन में इस क्षेत्र के किसी भी बाढ़ सुरक्षा बांध में दरार नहीं आई है। सरकार का कहना है कि इन कार्यों से गांवों और कृषि भूमि की सुरक्षा को मजबूत किया गया है। मरड़ का कार्य अभी बाकी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और आवश्यक सुधार आगे भी जारी रखने की योजना है।