ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार सहयोग को बढ़ावा देने की अपील
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में मंत्री गोयल का संबोधन
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने और पेशेवर डिग्रियों की आपसी मान्यता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत मंडपम् में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र में कहा कि ब्रिक्स देशों का वैश्विक व्यापार में लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। उन्होंने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए अधिक बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता और सरल नियामक प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सत्र में रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी अपने विचार साझा किए। गोयल ने कहा कि भारत ब्रिक्स देशों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साथी है, विशेषकर इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्रों में। उन्होंने इन उत्पादों के लिए ब्रिक्स को एक आवश्यक बाजार के रूप में देखा।
उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग आवश्यक है। गोयल ने ब्रिक्स के सदस्य देशों से अपने बाजारों को खोलने और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की अपील की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, एग्री-टेक स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने, सेवा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने इस शिखर सम्मेलन के विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्राथमिकताएं वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
श्री प्रसाद ने डिजिटल सेवाओं, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने एआई में प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का उल्लेख करते हुए उन्होंने सेमीकंडक्टर पारितंत्र के विकास के लिए सहयोग का आह्वान किया।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि ब्रिक्स एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है, जिसमें 2003 में 84 अरब डॉलर का व्यापार 2024 में लगभग 1.2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने के लिए किफायती कार्यशील पूंजी की आवश्यकता पर बल दिया।