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ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच शबीर अहमद की रिहाई पर विवाद

ब्रिटेन में 73 वर्षीय शबीर अहमद की जेल से रिहाई ने दोनों देशों के बीच विवाद को जन्म दिया है। 2012 में यौन अपराधों के लिए सजा काट रहे शबीर को अचानक रिहा कर दिया गया, जिससे ब्रिटेन उसे पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले ने ब्रिटिश राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर जब से पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स का मुद्दा सामने आया है। जानें इस जटिल स्थिति के पीछे की कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
 

शबीर अहमद की रिहाई से उत्पन्न विवाद

73 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति शबीर अहमद की जेल से रिहाई ने ब्रिटेन और पाकिस्तान में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। यह घटना भारत में भी चर्चा का विषय बन गई है। शबीर अहमद को 2012 में 22 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अब उसे अचानक रिहा कर दिया गया है। जैसे ही वह जेल से बाहर आया, ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई। शबीर अहमद एक पाकिस्तानी नागरिक है जिसने ब्रिटेन की नागरिकता भी ले रखी है। अब ब्रिटेन उसे पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस प्रकार शबीर अहमद की कहानी एक नई दिशा में बढ़ रही है। 


ब्रिटेन में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग का मुद्दा

हाल ही में ब्रिटेन की संसद में पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स द्वारा 250,000 ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों का खुलासा हुआ था। यह मुद्दा ब्रिटेन में वर्तमान में सबसे बड़ा राजनीतिक विषय बन गया है, खासकर जब से ब्रिटिश प्रधानमंत्री की इस्तीफे की घोषणा हुई है। ऐसे में, शबीर अहमद जैसे अपराधियों को सजा दिलाने और उन्हें देश से बाहर करने की मांग बढ़ रही है। शबीर अहमद ने ब्रिटिश राजनीति में हलचल मचा दी है। ब्रिटेन के 149 क्षेत्रों में जहां मुस्लिम आबादी 50% तक पहुंच गई है, वहां पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स सक्रिय रहे हैं। 


रॉचडेल ग्रूमिंग गैंग का मामला

रॉचडेल, इंग्लैंड का एक शहर है, जहां शबीर अहमद ने कई गंभीर यौन अपराध किए थे। उसे कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में सजा सुनाई गई थी। 2012 में उसे 22 साल की सजा दी गई थी, जिसका मतलब था कि उसे 2034 में रिहा होना था। लेकिन अब उसे 2026 में ही रिहा कर दिया गया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन की वर्तमान लेबर सरकार ने जानबूझकर उसे जल्दी रिहा किया है ताकि वे मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन प्राप्त कर सकें। हालांकि, ब्रिटेन के दक्षिणपंथी नेताओं और जनता ने मांग की है कि शबीर अहमद को तुरंत पाकिस्तान भेजा जाए। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि वह शबीर अहमद को वापस नहीं लेगा, क्योंकि उसने ब्रिटेन की नागरिकता भी ले रखी है। ब्रिटेन का कहना है कि उसने 2012 में ही शबीर अहमद की नागरिकता समाप्त कर दी थी।