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ब्रिटेन में अमेरिकी एयरबेस के पास संदिग्धों की गिरफ्तारी: आतंकवादी साजिश का शक

दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के ग्लॉस्टर शायर में अमेरिकी एयरबेस के पास पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी ने आतंकवादी साजिश के शक को जन्म दिया है। रात के समय हुई इस घटना में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को हिरासत में लिया और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये लोग अमेरिकी हितों को नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहे थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और संदिग्धों की पहचान पर उठ रहे सवाल।
 

ग्लॉस्टर शायर में संदिग्ध गतिविधियाँ

दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड का शांत ग्लॉस्टर शायर इलाका रात करीब 12:45 बजे अचानक सायरन की आवाज़ और ब्रिटिश कमांडो की हलचल से गूंज उठा। अमेरिकी सैन्य एयरबेस आरएएफ फेयरफोर्ड के निकट तीन संदिग्ध गाड़ियाँ रुक गईं, जिसके बाद पांच संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के चलते आसपास के लगभग 50 घरों को तुरंत खाली कराया गया और 400 मीटर के क्षेत्र को घेर लिया गया। बम डिस्पोजल स्क्वाड भी मौके पर पहुंचा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये लोग किसी बड़े नुकसान की योजना बना रहे थे और दोनों देशों की एजेंसियाँ इन पर लंबे समय से नज़र रख रही थीं।


संदिग्धों की गिरफ्तारी का विवरण

इस घटना की शुरुआत 27 सितंबर की रात को हुई, जब ब्रिटिश काउंटर टेररिज्म पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि तीन संदिग्ध गाड़ियाँ एयरबेस की ओर बढ़ रही हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गाड़ियों को रोका और पांचों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। सुरक्षा के मद्देनजर 400 मीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया और 85 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। मौके पर एक रिमोट कंट्रोल बम डिस्पोजल रोबोट सफेद वैन की जांच कर रहा था, जिसमें कुछ संदिग्ध वस्तुएं दिखाई दे रही थीं। प्रारंभिक जांच में इन पर विस्फोटक अधिनियम के तहत गिरफ्तारी की गई, लेकिन बाद में आतंकवादी साजिश की तैयारी के संदेह में कानूनी कार्रवाई की गई।


संदिग्धों की पहचान पर सवाल

ब्रिटिश काउंटर टेररिज्म पुलिस ने अभी तक संदिग्धों के नाम, पहचान या राष्ट्रीयता का खुलासा नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं और किसी भी तरह की अटकलों से बचना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कहा कि अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियाँ मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दे रही थीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ये लोग एयरबेस या अमेरिकी हितों को गंभीर नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहे थे, जिससे यह मामला सामान्य घुसपैठ से कहीं अधिक गंभीर प्रतीत होता है।