भारत-इटली संबंधों पर FCRA संशोधन बिल का समर्थन
कार्लो लोम्बार्डी, जो भारत-इटली संबंधों के विशेषज्ञ हैं, ने FCRA संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने विदेशी फंडिंग की निगरानी के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि NGOs मानवता के लिए महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन वे विदेश नीति का एक माध्यम भी बन सकते हैं। उन्होंने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में ऐसे कानूनों के इतिहास का उल्लेख किया, जो विदेशी प्रभावों का मुकाबला करने के लिए बनाए गए थे। जानें उनके विचार और इस विषय पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य।
Aug 12, 2026, 15:50 IST
FCRA संशोधन बिल पर कार्लो लोम्बार्डी का दृष्टिकोण
भारत-इटली संबंधों के विशेषज्ञ और सलाहकार कार्लो लोम्बार्डी ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की निगरानी करना देश के लिए आवश्यक है, क्योंकि इन फंड्स का उपयोग विदेश नीति के उपकरण के रूप में भी किया जा सकता है। बिल के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह कानून पहली बार 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। लोम्बार्डी ने कहा कि 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए थे, और उस समय यह कानून और भी सख्त था।
FCRA बिल पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में, उन्होंने NGOs की मानवीय भूमिका को स्वीकार किया और कहा, "NGOs बहुत अच्छे होते हैं। वे मानवता के लिए महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन वे विदेश नीति का एक माध्यम भी हैं। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है।" उन्होंने 1983 में US नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) के गठन का उल्लेख किया और इसके सह-संस्थापक एलन वेनस्टीन के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन दर्शाता है कि कैसे गैर-सरकारी संस्थाएं विदेश नीति के बड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में शामिल हो सकती हैं। लोम्बार्डी ने कहा कि NGOs भी विदेश नीति का एक माध्यम हैं और यह महत्वपूर्ण है कि सरकार को पता हो कि कौन किसे और किस उद्देश्य से फंडिंग कर रहा है। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि विदेशी NGOs से आने वाले पैसे का उपयोग वास्तव में उन उद्देश्यों के लिए किया जाए जिनका उल्लेख किया गया है, न कि इसका दुरुपयोग हो।
दुनिया के अन्य देशों में FCRA जैसे कानून
FCRA जैसे कानूनों के बारे में बात करते हुए लोम्बार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों में ऐसे कानून कई दशकों से लागू हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने 1938 में 'फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट' पारित किया था। यह कानून जर्मनी के गुप्त प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था, जिसके माध्यम से जर्मनी अमेरिका की नीति को 'नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी' की दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और UK जैसे देशों ने भी ऐसे कानून बनाए हैं।