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भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते में तेजी, नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते संबंध

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और कुछ अंतिम मुद्दों पर सहमति बनानी बाकी है। इस समझौते के साथ ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अक्टूबर में विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा और दिसंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी से भी महत्वपूर्ण घोषणाएँ हो सकती हैं।
 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति

(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 26 सितंबर - अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने जानकारी दी है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला है। अधिकारी ने बताया कि इस व्यापार समझौते पर दोनों देशों ने '90 प्रतिशत से अधिक' कार्य पूरा कर लिया है, और अब केवल कुछ अंतिम मुद्दों पर सहमति बनानी बाकी है। जब 'पीटीआई' ने पूछा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कब होंगे, तो अधिकारी ने कहा, "मैं यही कहूंगा कि इंतजार कीजिए, हम बहुत करीब हैं।"


उन्होंने आगे कहा, "90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है और अब कुछ अंतिम चीजों पर काम चल रहा है, इसलिए उम्मीद है कि आपको जल्द ही इस पर कुछ देखने को मिलेगा।" अधिकारी ने यह भी कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका के संबंधों को, विशेषकर व्यापार के क्षेत्र में, वास्तव में एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।


अधिकारी ने कहा, "मुझे लगता है कि हम समझौते के बहुत करीब हैं और जब यह हो जाएगा, तो यह निश्चित रूप से एक बड़ी और उत्साहजनक उपलब्धि होगी।" अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अक्टूबर में भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने पर, अधिकारी ने कहा, "यह यात्रा भारत-अमेरिका साझेदारी में निरंतर प्रगति और दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्क का हिस्सा है।"


अमेरिका के फ्लोरिडा में दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। इस बारे में अधिकारी ने कहा कि उस समय कुछ बड़े ऐलान भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस साल क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) से संबंधित विदेश मंत्रियों की बैठक तीसरी बार होने जा रही है।


अधिकारी ने कहा, "यह अभूतपूर्व है। इससे पहले विदेश मंत्रियों की एक वर्ष में इतनी बार बैठक नहीं हुई। मुझे लगता है कि इससे साफ होता है कि हम इस राजनयिक समूह को कितना महत्व दे रहे हैं।" भारत के साथ-साथ जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसे काफी अहमियत देते हैं, इसलिए इस संबंध में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रखिए।


भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह अमेरिका और भारत दोनों की "बहुत बड़ी प्राथमिकता" है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही घटनाओं के कारण आईएमईसी की प्रगति को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है, लेकिन यदि क्षेत्र में स्थिरता आती है, तो परियोजना तेजी से आगे बढ़ सकती है। अधिकारी ने कहा, "भारत और अमेरिका, दोनों आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आई चुनौतियों के कारण इसमें रुकावट आई।"


उन्होंने कहा, "असल में यह पूरा मामला पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर निर्भर है। जब वहां स्थिरता आएगी, तब आप आईएमईसी को तेजी से आगे बढ़ते हुए देखेंगे।"