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भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। दोनों देशों के नेताओं ने बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थायी शांति की आवश्यकता और 'क्वाड' के महत्व पर भी चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के बारे में और क्या कहा गया।
 

भारत और ऑस्ट्रेलिया की आतंकवाद पर संयुक्त प्रतिक्रिया

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को आतंकवाद की समस्या की कड़ी निंदा की और सभी देशों से बिना किसी भेदभाव के इस पर एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के बीच हुई बातचीत के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने उस क्षेत्र में स्थायी शांति की भारत की इच्छा को दोहराया।


क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा

मिसरी ने कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मामलों पर अपने विचार साझा किए, जिसमें आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ जैसी चिंताएं शामिल थीं। हाल के समय में दोनों देशों ने इस क्षेत्र में कई गंभीर घटनाओं का सामना किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने 'क्वाड' (Quad) के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की, जिसे क्षेत्र की गंभीर चुनौतियों का सामना करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन माना गया।


आतंकवाद पर साझा चिंताएं

एक प्रश्न के उत्तर में, मिसरी ने कहा कि आतंकवाद दोनों देशों के लिए एक साझा चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि चर्चा के दौरान उन भयानक आतंकवादी घटनाओं का उल्लेख किया गया, जिनका प्रभाव दोनों देशों पर पड़ा है। उन्होंने कहा, "यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर दोनों देशों की सोच पूरी तरह से मेल खाती है, और इस चुनौती का सामना करने के लिए बातचीत, क्षमताओं को बढ़ाने और कार्रवाई के तरीकों पर सहमति है।"