भारत का अगला पीढ़ी का एयर डिफेंस सिस्टम: एक नई शक्ति का उदय
भारत ने अपने स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कुशा का सफल परीक्षण किया है, जो S400 के समकक्ष माना जा रहा है। यह सिस्टम तीन स्तरों में कार्य करता है और भारत की सुरक्षा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का वादा करता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि यह परीक्षण केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि भविष्य की रणनीति का हिस्सा है। जानें इस सिस्टम की विशेषताएँ और भारत की सुरक्षा योजनाएँ।
Mar 27, 2026, 10:49 IST
भारत की नई एयर डिफेंस ताकत
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच, भारत ने अपनी अगली पीढ़ी के एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन किया है, जिसने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ हवाई नियंत्रण में भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तैयार है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपने स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे कुशा प्रोजेक्ट कहा जाता है, का पहला सफल परीक्षण किया है। इसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ईआरएडीएस) के नाम से जाना जाता है, और इसे S400 एयर डिफेंस सिस्टम के समकक्ष माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग ₹21,700 करोड़ है, जिसका उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ठिकानों को सुरक्षा प्रदान करना है।
डिफेंस सिस्टम की संरचना
इस सिस्टम की वास्तविक क्षमता इसके तीन स्तरों में निहित है। पहला M1 इंटरसेप्टर है, जिसकी रेंज 150 कि.मी. है, जो फाइटर जेट्स और प्रिसिजन वेपंस को हवा में ही नष्ट कर सकता है। दूसरा M2 इंटरसेप्टर 350 कि.मी. की रेंज के साथ एईएसए रडार से लैस है, जो अधिक सटीकता और खतरनाकता प्रदान करता है। तीसरा M3 इंटरसेप्टर 350 से 400 कि.मी. की रेंज में कार्य करता है, जो एब्ल्यूएसीएस जैसे उच्च मूल्य के लक्ष्यों और बैलस्टिक मिसाइलों को निशाना बना सकता है। यह एक मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच है, जो दुश्मन के हवाई हमलों को विभिन्न स्तरों पर रोक सकता है।
भविष्य की योजनाएं
भारतीय वायुसेना ने पहले ही कई स्क्वाड्रनों की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इस सिस्टम का विकास मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2035 तक पूरे भारत में एक एकीकृत एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क स्थापित करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से मिलने वाले सभी ऑपरेशनल और तकनीकी सबक भारत की रणनीति में शामिल किए जाएंगे। यह केवल एक परीक्षण नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत भविष्य में अपनी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ हवाई नियंत्रण में भी अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।