भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात: चीन को 35,000 करोड़ रुपये का निर्यात और नए कारखानों की स्थापना
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में बताया कि भारत ने पिछले वर्ष चीन को 35,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में घटक निर्माण का पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है, और अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखानों की स्थापना की योजना है। यह भारत की विनिर्माण यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों की क्षमताओं पर जोर दिया गया है।
Jun 8, 2026, 19:46 IST
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को जानकारी दी कि भारत ने पिछले वर्ष चीन को 35,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात किए हैं। उन्होंने बताया कि देश में घटक निर्माण का पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है। अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखानों की स्थापना की योजना है। मंत्री ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में लगातार प्रगति कर रहा है।
चीन-उत्तर कोरिया संबंधों पर एक नजर
वैष्णव ने कहा कि पिछले वर्ष चीन को 35,000 करोड़ रुपये के उपकरण निर्यात किए गए। वर्तमान में 75 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखाने निर्माणाधीन हैं, और अगले कुछ वर्षों में लगभग 250 घटक निर्माण कारखाने स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भारत उसी विनिर्माण यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, जिसे कई सफल विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं ने अतीत में अपनाया था।
उन्होंने कहा कि हम मूल्य श्रृंखला में उसी तरह आगे बढ़ रहे हैं जैसे अन्य देशों ने किया है। हमने तैयार उत्पादों के निर्माण से शुरुआत की, जैसे कि चीन, वियतनाम और ताइवान ने किया। अब हम मॉड्यूल निर्माण के स्तर तक पहुँच चुके हैं और पुर्जों के निर्माण की दिशा में बढ़ रहे हैं। वैष्णव ने वंदे भारत ट्रेन का उदाहरण देते हुए भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों की क्षमताओं को भी उजागर किया।
भारतीय इंजीनियरों की क्षमताओं पर जोर
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिजाइन किया गया है और भारतीय वेल्डर, फिटर और तकनीशियनों द्वारा निर्मित किया गया है। मंत्री ने बताया कि चीन और दक्षिण कोरिया ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने विनिर्माण अभियान शुरू किए थे, जबकि भारत का प्रमुख विनिर्माण अभियान लगभग एक दशक पहले शुरू हुआ।