भारत का तेल आयात: रूस से बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकट
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल संकट ने भारत की स्थिति को मजबूत किया है। भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे वह वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है। हाल ही में, एक रूसी तेल टैंकर ने अचानक भारत की ओर रुख किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है, जबकि भारत ने ईरान के संकट के कारण अपनी खरीदारी को बढ़ाया है। इस लेख में भारत की रणनीति और वैश्विक तेल बाजार में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई है।
Mar 19, 2026, 11:33 IST
तेल संकट और भारत की स्थिति
ईरान और अमेरिका के बीच इजराइल में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल संकट ने सभी देशों को प्रभावित किया है। इस बीच, भारत ने अपनी स्थिति को मजबूती से प्रस्तुत किया है। हाल ही में, हॉर्मोज स्ट्रेट से भारत के दो जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाह पर पहुंचे। अब, भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दरअसल, दक्षिण चीन सागर में एक रूसी तेल टैंकर अचानक भारत की दिशा में मुड़ गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। चीन के रिजाऊ बंदरगाह की ओर बढ़ रहे टैंकर अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। तेल और गैस की बढ़ती मांग के बीच, भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह बदलाव ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति में रुकावट के बाद किया गया है। एक्वाटाइटन नामक यह आफरा मैक्स टैंकर बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से जनवरी के अंत में उालस क्रूड ऑयल लोड करके निकला था। प्रारंभ में इसका गंतव्य चीन का रिजाऊ पोर्ट था, लेकिन मार्च के मध्य में यह दक्षिण चीन सागर में पहुंचते ही दिशा बदलकर भारत की ओर बढ़ गया। यह जहाज 21 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचने वाला है, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत हमेशा से रूस से तेल खरीदता रहा है।
अमेरिका की छूट और भारत की रणनीति
हाल ही में, अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। हालांकि, यह दावा गलत है क्योंकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कई बार कहा है कि भारत को किसी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। रूस और भारत के बीच समझौते के अनुसार, कई तेल कंपनियां रूस से तेल खरीद रही हैं। लेकिन जिस तरह से चीन की ओर जा रहा कार्गो अब भारत की ओर मुड़ा है, उससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। यह जहाज उस समय भारत की ओर मुड़ा है जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हार्मूज पर रोक लगा रखी है, जो कि विश्व के 20 से 25% तेल का मार्ग है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच युद्ध, जो कुछ दिनों में समाप्त होने की उम्मीद थी, अब 20वें दिन भी जारी है। ईरान के कई प्रमुख नेता और अधिकारी अमेरिका और इजराइल द्वारा लक्षित हमलों का शिकार हो रहे हैं। इस बीच, पूरी दुनिया की नजरें भारत की ओर हैं। कई नेता मानते हैं कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका और ईरान के नेताओं से संपर्क करें, तो यह युद्ध समाप्त हो सकता है।
रूस से बढ़ती खरीदारी और वैश्विक आंकड़े
ईरान के संकट के कारण, अमेरिका ने 26 मार्च को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी ताकि वैश्विक तेल की कमी न हो। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस प्रतिदिन लगभग 3.3 से 4.2 मिलियन बैरल कच्चा तेल बेच रहा है, जिसमें चीन सबसे बड़ा खरीदार है, जो 48 से 52% यानी लगभग 2 मिलियन बैरल खरीदता है। भारत भी इस सूची में है, जिसने फरवरी में 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन खरीदा, जो मार्च में बढ़कर 1.5 मिलियन बैरल हो गया है। तुर्की भी 6 से 11% तक खरीदारी कर रहा है। भारत और चीन मिलकर रूस से 80% तेल खरीद रहे हैं। पहले रूसी तेल की कीमतें ब्रेंट क्रूड से 10 से 13 डॉलर कम थीं, लेकिन अब संकट के कारण छूट कम हो गई है। भारत ने फरवरी 2026 में लगभग 1 मिलियन से 1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन खरीदा, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है। मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 1 मिलियन बैरल तक पहुंच गया है। हारमूज के बंद होने के कारण सऊदी अरब, इराक और यूएई से तेल की आपूर्ति कम हो गई है। अमेरिका की छूट के बाद, भारत ने तुरंत 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। आईओसीएल और रिलायंस जैसी कंपनियां भी इस खरीदारी में शामिल हैं। भारत प्रतिदिन 4.5 से 5.3 मिलियन बैरल तेल का आयात करता है, जिससे रूस अब एक प्रमुख सप्लायर बन गया है।
रूस का लाभ और पाकिस्तान की स्थिति
इस संकट का लाभ उठाकर रूस चीन और भारत को अधिक तेल बेच रहा है और अच्छा मुनाफा कमा रहा है। पाकिस्तान को भी ऑफर दिए जा रहे हैं, लेकिन वह चुप्पी साधे हुए है। भारत ने मार्च में रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है क्योंकि उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खबरें हैं कि कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, अब अचानक मुड़कर भारत की ओर आ रहे हैं। हालांकि, भारत ने इस पर कोई आधिकारिक आंकड़ा पेश नहीं किया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि रूस तेल बेच रहा है। जब भी रूस पाकिस्तान को कोई ऑफर देता है, भारत की नजरें उस पर होती हैं। पाकिस्तान की राजनीति और सेना जब भी रूस के साथ अपने संबंध बढ़ाने की कोशिश करती है, तो भारत सतर्क हो जाता है।