भारत का नया ड्रोन रोधी सिस्टम 'शत्रुंजय' दुश्मनों के लिए खतरा
भारत ने अपने नए ड्रोन रोधी सिस्टम 'शत्रुंजय' को पेश किया है, जो दुश्मनों के हवाई हमलों का सटीक जवाब देने में सक्षम है। यह प्रणाली दुश्मनों के ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखती है। 'शत्रुंजय' का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील सैन्य ठिकानों को सुरक्षित करना है। इसकी तकनीकें दुश्मनों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं। जानें इस प्रणाली की विशेषताएँ और कैसे यह भारत की सुरक्षा को मजबूत कर रही है।
Aug 8, 2026, 12:26 IST
शत्रुंजय: भारत का नया एंटी-ड्रोन सिस्टम
भारत ने अपने नए और प्रभावी ड्रोन रोधी सिस्टम 'शत्रुंजय' को पेश किया है। यह प्रणाली दुश्मनों के हवाई हमलों का सटीक जवाब देने में सक्षम है। पाकिस्तान और चीन की ड्रोन गतिविधियों को अब हवा में ही नष्ट किया जाएगा, जिससे उनके मंसूबे ध्वस्त हो जाएंगे। शत्रुंजय हर उड़ते खतरे का पीछा करेगा, और इसके हमले से बचना अब असंभव है। पिछले कुछ वर्षों में, ड्रोन आतंकवाद और जासूसी का एक प्रमुख साधन बन गए हैं। भारत को अस्थिर करने के लिए दुश्मनों ने कई बार प्रयास किए हैं, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। शत्रुंजय, जिसका नाम 'दुश्मन' और 'विजय' के संयोजन से बना है, दुश्मनों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। यह स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम न केवल पाकिस्तान और चीन के लिए, बल्कि हर शत्रु के लिए एक चुनौती है।
शत्रुंजय की तकनीकी विशेषताएँ
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली की रक्षा कंपनी भूमि एंड द्वारा विकसित यह काउंटर अनमेड एरियल सिस्टम (सीयूएएस) भारतीय सेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों, संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थलों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से सुरक्षित करना है। शत्रुंजय रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) डिटेक्शन तकनीक का उपयोग करता है, जो लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के ड्रोन की पहचान कर सकता है। इसकी एंटीना आधारित सिग्नेचर डिटेक्शन और डायरेक्शन फाइंडिंग तकनीक तुरंत यह पता लगा लेती है कि ड्रोन किस दिशा से संचालित हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बिना गोली चलाए दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर सकता है। यह सॉफ्ट किल तकनीक पर आधारित है, जो ड्रोन के कंट्रोल सिग्नल को जाम कर देती है। इसके अलावा, जीपीएस स्पूफिंग और जीएसएस डिरप्शन तकनीक का उपयोग करके यह दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम को भी भटका देता है।
शत्रुंजय की अजय क्षमता
शत्रुंजय की डिटेक्शन रेंज 4 किलोमीटर है और इसमें ओमनी डायरेक्शनल जैमिंग की सुविधा भी है। यह प्रणाली 5 किलोमीटर तक की मुख्य तकनीक पर काम करती है। चाहे दुश्मन तुर्की के ड्रोन का उपयोग करे या चीन के, शत्रुंजय के चक्रव्यूह से बचना अब असंभव है। इसमें दो प्रकार की जैमिंग क्षमताएँ हैं: ओमनी डायरेक्शनल जैमिंग जो लगभग 2 किलोमीटर तक प्रभावी है, और डायरेक्शनल जैमिंग जो सीधे 5 किलोमीटर तक दुश्मन के तंत्र को नष्ट कर सकती है। यह प्रणाली न केवल शक्तिशाली है, बल्कि इसे भारी सैन्य वाहनों पर आसानी से माउंट किया जा सकता है। इसे सैनिक खुद भी उठाकर मोर्चे पर ले जा सकते हैं। यह स्टैंड अलोन और मोबाइल दोनों प्रकार की तैनाती के लिए तैयार है। चाहे मौसम कितना भी खराब हो, शत्रुंजय अपनी क्षमता बनाए रखता है। यह लगभग 3000 मीटर की ऊँचाई तक काम कर सकता है।
शत्रुंजय की अत्याधुनिक तकनीक
सियाचीन जैसी -20° सेल्सियस की ठंड या रेगिस्तान के 55 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी इसकी कार्यक्षमता प्रभावित नहीं होती। इसमें एआई आधारित इलेक्ट्रो आर्टिफिशियल ट्रैकिंग, सब सिक्स जीएच जेड आरएफ स्पेक्ट्रम सर्किल्स और एईएस 256 एन्क्रिप्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जो निगरानी को और भी सटीक बनाती हैं। दुश्मनों के लिए शत्रुंजय एक काल बन चुका है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की ओर से आने वाले ड्रोन शत्रुंजय के बीम से हवा में ही नष्ट हो जाते हैं। इसकी टैगलाइन 'हवा में भस्म होना' है। भारतीय सेना ने इसकी संख्या का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन शत्रुंजय का सेना में शामिल होना इस बात का संकेत है कि अब भारत हमले का इंतजार नहीं करता, बल्कि खतरे को हवा में ही समाप्त कर देता है।