भारत का लॉबिंग फर्मों का उपयोग: विदेश मंत्रालय की स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि देशों, दूतावासों, व्यावसायिक संस्थाओं और निजी संगठनों के लिए लॉबिंग फर्मों की नियुक्ति एक "मानक प्रक्रिया" है। यह बयान अमेरिका में विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत हाल ही में प्रस्तुत दस्तावेजों के संदर्भ में आया, जिसमें भारतीय पक्ष द्वारा अमेरिकी समकक्षों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए ऐसी फर्मों का उल्लेख किया गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह एक पुरानी प्रथा है, और भारत 1950 के दशक से ऐसी लॉबिंग फर्मों को नियुक्त करता आ रहा है। वाशिंगटन डीसी और अमेरिका में यह सामान्य है कि देश, दूतावास, व्यावसायिक संस्थान और निजी संगठन लॉबिस्ट और सलाहकारों को नियुक्त करते हैं। भारतीय दूतावास भी 1950 के दशक से इस प्रक्रिया का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन फर्मों का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और लोगों को इनकी जानकारी प्राप्त करने के लिए संबंधित वेबसाइट पर जाने की सलाह दी।
लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC का विवरण
अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC ने FARA के तहत रिकॉर्ड में बताया कि उसने भारतीय एंबेसी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच कूटनीतिक संपर्क को सुगम बनाया। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, इस फर्म ने कई ईमेल, फोन कॉल और मुलाकातें आयोजित कीं। भारत सरकार ने इस फर्म के साथ 24 अप्रैल को करार किया था। रिकॉर्ड के अनुसार, 10 मई को भारत-पाक संघर्ष विराम के दिन एंबेसी ने वाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और व्यापार प्रतिनिधि से संपर्क किया।
लॉबिंग की पुरानी परंपरा
हालांकि, भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में दूतावासों और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा लॉबिंग सेवाओं का उपयोग एक स्थापित प्रक्रिया है। भारतीय दूतावास 1950 से ऐसी फर्मों की सेवाएं लेता रहा है। इसके अलावा, विदेशी सरकारों द्वारा अमेरिका में लॉबिंग करना FARA नियमों के तहत एक कानूनी परंपरा है। भारत सरकार ने पिछले साल 24 अप्रैल को इस फर्म के साथ एक करार किया था।