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भारत की आर्थिक ताकत: प्रवासी भारतीयों की रेमिटेंस से बढ़ती साख

भारत ने हाल ही में प्रवासी भारतीयों की रेमिटेंस के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 138 बिलियन डॉलर की रेमिटेंस मिलने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक है। यह धन भारत के व्यापार घाटे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कवर करता है। जानें कैसे भारतीय प्रवासी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इसके प्रभाव क्या हैं।
 

भारत की वैश्विक भूमिका और प्रवासी भारतीयों का योगदान

दुनिया आज युद्ध की विभीषिका से जूझ रही है, चाहे वह पश्चिम एशिया हो या रूस-यूक्रेन का संकट। इस कठिन समय में, भारत ने एक आर्थिक रणनीति अपनाई है जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। वर्तमान में, भारत केवल एक दर्शक नहीं है, बल्कि एक विश्व मित्र की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शांति का संदेश देते हैं, जबकि भारतीय प्रवासी अपनी मेहनत से देश की नींव को मजबूत कर रहे हैं। मॉर्गन स्टैनली की हालिया रिपोर्ट इस बढ़ती प्रतिष्ठा की पुष्टि करती है। प्रवासी भारतीयों ने विदेश से धन भेजने में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे भारत को 138 बिलियन डॉलर की रेमिटेंस मिलने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक है। यह राशि हमारे व्यापार घाटे का 40 से 45% हिस्सा कवर करती है.


रेमिटेंस का महत्व और वैश्विक स्थिति

भारत द्वारा विदेशों से की जाने वाली खरीदारी का आधा भुगतान प्रवासी भारतीय करते हैं। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। जीसीसी देशों, जैसे कि यूएई, सऊदी अरब और क़तर में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और निर्माण क्षेत्रों में मंदी देखी जा रही है। पहले भारत पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अमेरिका और अन्य विकसित देशों से रेमिटेंस का 42% हिस्सा आ रहा है, और भारतीय अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि बड़ी टेक कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं। हालांकि, केरल जैसे राज्यों के लिए यह चिंता का विषय है, जहां 20% रेमिटेंस सीधे खाड़ी देशों से आती है। यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो हमें एक होम कमिंग पॉलिसी की आवश्यकता होगी ताकि लौटने वाले कुशल भारतीयों का सही उपयोग किया जा सके.


रेमिटेंस का उपयोग और भारत की आर्थिक स्थिति

आरबीआई के पुराने सर्वेक्षण के अनुसार, रेमिटेंस का अधिकांश हिस्सा पारिवारिक जरूरतों के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ धन का उपयोग निवेश और बचत के लिए भी किया जाता है। इस तिमाही में रेमिटेंस में वृद्धि का एक कारण त्योहारों और शादियों का समय भी है, जब प्रवासी भारतीय अपने घरों में अधिक धन भेजते हैं। भारत की असली ताकत उसकी सेना के साथ-साथ उसकी आर्थिक संरचना भी है। मॉर्गन स्टैनली की यह रिपोर्ट हमें सचेत करती है और गर्वित भी करती है।