भारत की कंटेनर निर्माण योजना: वैश्विक व्यापार में बदलाव की ओर एक कदम
कंटेनर निर्माण का महत्व
वैश्विक व्यापार में एक पुरानी कहावत है कि समुद्री मार्गों पर नियंत्रण रखने वाला व्यापार की दिशा निर्धारित करता है। लेकिन 21वीं सदी में यह कहावत थोड़ी बदल गई है। अब समुद्र पर केवल जहाजों का ही नहीं, बल्कि शिपिंग कंटेनरों का भी राज है। आज दुनिया का 90% से अधिक व्यापार समुद्र के रास्ते होता है। आपके कपड़े, गाड़ियों के कलपुर्जे और कारखानों का कच्चा माल सभी कंटेनरों में यात्रा करते हैं। लेकिन इस वैश्विक व्यापार की सबसे कमजोर कड़ी यह है कि पूरी दुनिया एक ही देश, चीन, पर निर्भर है। चीन अकेले 80 से 90% शिपिंग कंटेनरों का निर्माण करता है। जब चीन चाहे, कंटेनरों की कमी पैदा कर सकता है, जिससे माल भाड़ा आसमान छू सकता है। अब, 28 अक्टूबर 2026 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय समिति ने इस एकाधिकार को तोड़ने का निर्णय लिया है। इस योजना का नाम है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (सीएमपीएस)।
भारत की निर्यात चुनौतियाँ
जब भी भारत अपने सामान का निर्यात बढ़ाता है, निर्यातकों को खाली कंटेनरों की खोज में भटकना पड़ता है। उन्हें विदेशी शिपिंग कंपनियों और चीनी निर्माताओं की शर्तों पर कंटेनर किराए पर लेने पड़ते हैं। संकट के समय, 40 फुट कंटेनर का किराया $500 से बढ़कर $8000 तक पहुंच जाता है। इस अप्रत्याशित वृद्धि से भारतीय छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) संकट में आ जाते हैं, क्योंकि उनकी शिपिंग लागत उत्पादन की कीमत से अधिक हो जाती है। इसी समस्या को हल करने के लिए भारत ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंटेनर निर्माण कार्यक्रम को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है।
नई योजनाएँ और विकास
प्रधानमंत्री ने स्पोर्ट्स गुड मैन्युफैक्चरिंग योजना को भी मंजूरी दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और स्थानीय संसाधनों के विकास के लिए योजनाएँ बनाई जाएंगी। यह हमेशा से एक सपना रहा है कि योजनाएँ स्थानीय स्तर पर बनाई जाएं। प्रधानमंत्री ने विकसित ग्राम योजना और केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को दीपावली का तोहफा देने के लिए चार महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। कंटेनर निर्माण योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख केंद्र बनाना है।
लंबी अवधि की योजना
इस योजना में 95% निर्माण एक ही देश में होता है। इसलिए, सभी शिपिंग कंपनियाँ चाहती हैं कि कोई अन्य देश कंटेनर निर्माण में अपनी स्थिति बनाए। प्रधानमंत्री द्वारा मंजूर की गई कंटेनर निर्माण योजना में ऐसे तत्व शामिल हैं कि आने वाले वर्षों में भारत कंटेनर निर्माण का नया गंतव्य बनेगा। यह योजना 13 वर्षों की है और दीर्घकालिक है। निर्माण में तात्कालिक परिणाम नहीं होते, इसके लिए समय और सावधानी से प्रयास की आवश्यकता होती है। जैसे मोबाइल फोन निर्माण में भारत ने कदम बढ़ाए हैं, उसी तरह कंटेनर निर्माण में भी हम धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे।