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भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत: सरकार का नया अनुमान

केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत बढ़ा दिया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन के कारण है। कृषि में सुधार और जीएसटी में बदलाव भी इस वृद्धि में योगदान देंगे। इसके अलावा, भारत ने वैश्विक व्यापार में बदलाव के चलते कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे निर्यात में वृद्धि की उम्मीद है। जानें और क्या-क्या है इस रिपोर्ट में।
 

देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में तेजी


केंद्र सरकार ने जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया


नए साल की शुरुआत के साथ, केंद्र सरकार ने देश की जीडीपी विकास दर के बारे में जानकारी साझा की है, जिसमें वृद्धि के अनुमान को बढ़ा दिया गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की बेहतर स्थिति के कारण होगी।


इस वृद्धि के पीछे घरेलू उद्योगों के सकारात्मक परिणाम, कृषि में सुधार और जीएसटी में बदलाव को प्रमुख कारण बताया गया है। इसी कारण से, सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के अनुमानों को संशोधित किया है। अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। सरकार द्वारा जारी आंकड़े देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देते हैं।


सेवा और कृषि क्षेत्र में वृद्धि की उम्मीद

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सेवा क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 में 7.3 प्रतिशत की अनुमानित वास्तविक जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) वृद्धि दर का एक महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। जबकि उद्योग और सेवा क्षेत्र में तेजी का रुख है, कृषि और संबंधित क्षेत्रों के साथ-साथ 'बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं' में मध्यम वृद्धि का अनुमान है। इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया है कि मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 2025-26 के दौरान 8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है।


द्विपक्षीय समझौतों से विकास को मिलेगा बढ़ावा

हाल के समय में वैश्विक व्यापार की धारणा में बदलाव के चलते, भारत ने अपनी व्यापार नीति में भी बदलाव किए हैं। अब एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय, कई देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर जोर दिया जा रहा है। इनमें से कई समझौते इस वित्त वर्ष से लागू होंगे, जिससे भारतीय उत्पादों को नए बाजार और अवसर मिलेंगे। इससे देश का निर्यात बढ़ेगा और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने।