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भारत की नई रक्षा डील: P8I पोसाइडन विमानों की खरीदारी

भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदा करने की योजना बना रहा है, जिसमें वह 3.5 अरब डॉलर में छह P8I पोसाइडन जासूसी विमानों की खरीदारी करेगा। यह डील भारतीय नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए है और इसे अमेरिकी सरकार के साथ किया जा रहा है। जानें इस डील के पीछे के कारण, विमानों की विशेषताएं और चीन की बढ़ती गतिविधियों के संदर्भ में इसका महत्व।
 

भारत की संभावित रक्षा डील

क्या भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदा करने जा रहा है जो हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को बदल सकता है? भारत 3.5 अरब डॉलर की लागत से छह नए P8I पोसाइडन जासूसी विमानों की खरीदारी की योजना बना रहा है। यह निर्णय भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए लिया गया है। यह डील अमेरिकी सरकार के साथ की जा रही है, जिसे फॉरेन मिलिटरी सेल्स (एफएमएस) के माध्यम से पूरा किया जाएगा।


सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर पिछले एक साल से बातचीत चल रही है। अब इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि क्यों खर्च की जा रही है? एक P8I विमान की कीमत लगभग 500 से 600 मिलियन डॉलर है।


P8I विमानों की कीमत और महत्व

यदि हम तुलना करें, तो 2009 में भारत ने आठ विमानों के लिए केवल 1.1 अरब डॉलर खर्च किए थे। उस समय प्रति विमान की लागत आधी थी, लेकिन अब कीमत दोगुनी क्यों हो गई है? बोइंग कंपनी का कहना है कि सप्लाई चेन में समस्याएं और महंगाई के कारण लागत बढ़ी है। हालांकि, भारतीय पक्ष इसे अत्यधिक मानता है।


फिर भी, भारत इस डील को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। P8I पोसाइडन कोई साधारण विमान नहीं है; यह एक मल्टी-रोल मैरिटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट है, जो कई महत्वपूर्ण मिशनों को एक साथ पूरा कर सकता है। यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने, और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस जुटाने में सक्षम है।


चीन की गतिविधियों के संदर्भ में

पिछले कुछ वर्षों में, चीन ने हिंद महासागर में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है। चीनी नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां भारतीय समुद्री क्षेत्र के निकट देखी जा रही हैं। ऐसे में भारत को एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो हर गतिविधि पर नजर रख सके। P8I विमान इस संदर्भ में गेम चेंजर साबित हो सकता है।


लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान, भारत ने इन विमानों का उपयोग पहाड़ों में भी किया था। इसका मतलब है कि ये विमान केवल समुद्र में नहीं, बल्कि जमीन पर भी निगरानी कर सकते हैं। अब अगला कदम कैबिनेट कमेटी की मंजूरी लेना है। यदि वहां से हरी झंडी मिलती है, तो यह डील अंतिम रूप ले लेगी।