भारत की भाषा का वैश्विक प्रभाव: रूस और स्लोवाकिया के राजदूतों के बयान
भाषा और शक्ति का संबंध
दुनिया में किसी देश की ताकत का आकलन उसकी भाषा से भी किया जा सकता है। यदि कोई देश कमजोर है, तो उसकी भाषा में कोई बात नहीं करेगा। लेकिन जब एक देश आर्थिक और सैन्य दृष्टि से मजबूत होता है, तो अन्य देश उसकी भाषा में बात करने के लिए तत्पर रहते हैं। भाषा एक प्रकार की सॉफ्ट पावर है। जहां युद्ध टैंकों और तोपों से लड़े जाते हैं, वहीं भाषा से मनोबल पर कब्जा किया जाता है। यदि पूरी दुनिया भारत और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में हिंदी में बात कर रही है, तो यह दर्शाता है कि भारत का भविष्य कितना उज्ज्वल है।
रूस और स्लोवाकिया के राजदूतों के बयान
हाल ही में, रूस और स्लोवाकिया के राजदूतों ने हिंदी में जो बयान दिए हैं, वे गर्व का विषय हैं। पीएम मोदी जल्द ही स्लोवाकिया की यात्रा पर जाने वाले हैं। रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने कहा कि, "माननीय विदेश सचिव श्री विक्रम मिश्री जी, गणमान्य अतिथियों, देवियों और सज्जनों, रूस के राष्ट्रीय दिवस पर आपका स्वागत है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि नरेंद्र मोदी जी ने भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का गौरव प्राप्त किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से मैं इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री जी और सभी भारतीयों को बधाई देता हूं।"
स्लोवाकिया के राजदूत का स्वागत
स्लोवाकिया के राजदूत रॉबर्ट मैक्सियन ने भी कहा कि, "प्रिय भारतवासियों, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का स्वागत करते हैं। उनकी स्लोवाकिया यात्रा हमारे संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। हमें उम्मीद है कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के बीच संबंधों को और मजबूत करेगी।"