भारत की वायु सेना के लिए Sukhoi 57: एक नई ताकत का आगाज़
भारत अपनी वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए Sukhoi 57 फाइटर जेट पर विचार कर रहा है। चीन के बढ़ते हवाई बेड़े के बीच, भारत को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की आवश्यकता महसूस हो रही है। जानें इस फाइटर जेट की विशेषताएँ, अमेरिका के विकल्प और संभावित चुनौतियाँ।
Feb 24, 2026, 12:31 IST
भारत की वायु सेना की नई योजना
भारत अपनी वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। आने वाले समय में वायुसेना के बेड़े में एक नया फाइटर जेट शामिल होने की संभावना है, जो दुश्मनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा। इस फाइटर जेट का नाम Sukhoi 57 है, जो एक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। इसकी आवश्यकता क्यों महसूस की गई, यह भी जानना महत्वपूर्ण है। हाल ही में, फ्रांस के साथ राफेल जेट डील को मंजूरी मिलने के बाद, भारत अब पांचवीं पीढ़ी के स्टिल्थ फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार है। जैसा कि उल्लेख किया गया है, रूस का Sukhoi 57 इस संदर्भ में भारत की प्राथमिकता बनकर उभरा है।
चीन के बढ़ते खतरे के बीच
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना ने चीन के बढ़ते हवाई बेड़े को देखते हुए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की आवश्यकता पर चर्चा को तेज कर दिया है। चीन के पास पहले से ही फिफ्थ जनरेशन के फाइटर जेट जैसे चिंगू J20 और J35 मौजूद हैं, जो ऑपरेशनल हैं। इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान को भी ये जेट देने का वादा किया है। पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के बाद, बीजिंग ने इस्लामाबाद को यह पहली रियायत दी थी। भारत को उम्मीद है कि स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट, उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान एएमसीए, अगले 10 वर्षों में तैयार हो जाएंगे।
रूसी Sukhoi 57 और अमेरिकी विकल्प
इस संदर्भ में, रूसी Sukhoi 57 को एक अंतरिम विकल्प के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, भारत के पास एक और विकल्प भी है, जो अमेरिका द्वारा प्रस्तावित F35 जेट है। लेकिन इस पर ज्यादा विचार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों का डर है। इन प्रतिबंधों में भारतीय हथियारों को विमान में एकीकृत करने की अनुमति न होना शामिल हो सकता है। सुखोई 30 एमटीआई में ब्रह्मोस मिसाइलें शामिल हैं, जिनका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था। एकीकरण के बिना, भारत पश्चिमी देशों से महंगे हथियार खरीदने के लिए मजबूर हो जाएगा। यही कारण है कि अमेरिका के इस विकल्प पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव
अगर अमेरिका के F35 जेट पर विचार किया गया, तो इसके साथ जुड़े प्रतिबंधों को भी ध्यान में रखना होगा। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तानी वायुसेना के F16 फाइटर के संचालन पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका की निगरानी में हर उड़ान होती है, और नियमित रखरखाव के लिए अमेरिकी इंजीनियर पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर तैनात रहते हैं। यदि इस विमान पर बातचीत आगे बढ़ती है, तो भारत को अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ेगा और साथ ही अमेरिका की शर्तों को भी मानना होगा। इसलिए, यह विकल्प भारत के लिए प्राथमिकता नहीं है।