भारत को अमेरिका से मिली तेल खरीदने में राहत, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच
अमेरिका का नया निर्णय
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और भारत पर संभावित तेल संकट के खतरे के बीच एक महत्वपूर्ण खबर आई है। अमेरिका, जो पहले भारत पर रूसी तेल के आयात को कम करने का दबाव बना रहा था, अब उसने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट प्रदान की है। इस निर्णय से उन रूसी तेल टैंकरों को राहत मिली है, जो कई हफ्तों से समुद्र में फंसे हुए थे और जिनका कोई खरीदार नहीं मिल रहा था।
रूसी तेल टैंकरों की स्थिति
नए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय भुगतान और बीमा में अनिश्चितता उत्पन्न हो गई थी। इसी कारण रूसी तेल टैंकरों का तेल तुरंत बंदरगाहों पर नहीं उतारा जा रहा था। अमेरिकी सख्ती के चलते इन जहाजों की पोर्ट एंट्री और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठने लगे थे। इस स्थिति के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने भी किनारे कर लिया था ताकि वे किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन न करें। अब अमेरिका से मिली हरी झंडी के बाद इन जहाजों का तेल भारत आने का रास्ता साफ हो गया है।
अमेरिका की रणनीति
अमेरिका का यह कदम मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की एक रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस छूट से वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई चेन बनी रहेगी और ईरान की ऊर्जा जरूरतों को बंधक बनाने की कोशिशें विफल होंगी। अमेरिकी अधिकारी बेसेंट ने सोशल मीडिया पर भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के तहत तेल और गैस का उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर है।
रूस को सीमित लाभ
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह 30 दिनों की छूट केवल एक अस्थायी उपाय है और इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा। यह अनुमति केवल उन तेल जहाजों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में फंसे हुए थे। इसके साथ ही, अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी।